मंत्री मंगल पांडेय के दावे की सच्चाई जान लीजिए...2013 के बाद आयुष औषधि की नहीं हुई खरीद, फिर भी कह रहे- आयुष चिकित्सा को दे रहे बढ़ावा

 मंत्री मंगल पांडेय के दावे की सच्चाई जान लीजिए...2013 के बाद आयुष औषधि की नहीं हुई खरीद, फिर भी कह रहे- आयुष चिकित्सा को दे रहे बढ़ावा

PATNA: बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का दावा और सच्चाई नदी के दोनों किनारा के समान है। 12 दिन पहले स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में जो जवाब दिया और अब जो बातें कह रहे उसमें जमीन-आसमान का अंतर है। स्वास्थ्य़ मंत्री ने राजद विधायक के सवाल के जवाब में खुद जानकारी दी कि 2013 के बाद बिहार में आयुष दवा का क्रय नहीं किया जा सका। 12 दिनों बाद वही स्वास्थ्य मंत्री कह रहे कि सरकार आयुष चिकित्सा को बढ़ावा दे रही है।  

दावे हैं दावों का क्या....

दरअसल स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बुधवार को बताया था कि स्वास्थ्य विभाग बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने को लेकर हर दिशा में काम कर रहा है। यही कारण है कि अब राज्य में एलोपैथिक चिकित्सा के साथ-साथ आयुष चिकित्सा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।आयुष चिकित्सा पर लोगों को इतना भरोसा है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में 46 लाख 2 हजार 514 मरीजों ने आयुष चिकित्सा पद्धति से अपना इलाज कराया है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके घर के समीप चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर पर आयुर्वेदिक चिकित्सकों एवं जीएनएम की भी तैनाती की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

स्वास्थ्य मंत्री के दावे की सच्चाई जानिए......

बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र में राजद के विधायक आलोक कुमार मेहता ने सवाल पूछा था. मॉनसून सत्र के अंतिम दिन यानी 30 जुलाई 2021 को सरकार ने जवाब दिया .स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने आलोक मेहता के तारांकित प्रश्न के जवाब में बताया कि 2013 में आयुष औषधियों का क्रय किया गया था. आयुष मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय आयुष मिशन का गठन 29 सितंबर 2014 को किया गया. राष्ट्रीय आयुष मिशन द्वारा ही राज्यों में आयुष प्रक्षेत्र के संवर्धन विकास एवं औषधियों के क्रय हेतु राशि उपलब्ध कराई जाने लगी. किंतु राशि खर्च के लिए राज्यों में राज्य आयुष समिति का गठन आवश्यक था. क्योंकि राज्य आयुष समिति के माध्यम से राशि व्यय की जानी थी .

आयुष समिति के गठन के तीन सालों बाद भी नहीं हुई दवा खरीद

उल्लेखनीय है कि बिहार में राज्य आयुष समिति का गठन मार्च 2018 में संभव हो सका. राज्य आयुष समिति के गठन के बाद प्रक्रियारत्त कार्रवाई पूर्ण करते हुए औषधियों के क्रय हेतु निविदा प्रकाशित की गई थी. अपरिहार्य कारणवश निविदा स्थगित करनी पड़ी. पुनः निविदा प्रकाशित कर औषधियों के क्रय की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है. यथाशीघ्र औषधियों का क्रय कर ग्रामीण क्षेत्र में पदस्थापित चिकित्सकों को उपलब्ध करा दिया जाएगा.

आलोक मेहता ने पूछा था सवाल

राजद विधायक आलोक मेहता का सवाल था कि क्या यह बात सही है कि राज्य में नेशनल हेल्थ मिशन योजना के अंतर्गत लगभग 1384 आयुष चिकित्सक 2010 ,े ही ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जो आयुष औषधि का अभाव झेल रहे हैं. मात्र 2013 में राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा आयुष औषधि का क्रय किया गया। उसके बाद औषधि का क्रय नहीं हुआ।

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