जानिए... वे कौन से कारण रहे जिससे एनडीए की हुई इतनी बड़ी जीत, विपक्ष का हो गया सूपड़ा साफ

जानिए... वे कौन से कारण रहे जिससे एनडीए की हुई इतनी बड़ी जीत, विपक्ष का हो गया सूपड़ा साफ

NEWS4NATION DESK : मोदी सरकार एकबार फिर पूर्ण बहुमत के साथ केन्द्र में सरकार बनाने को तैयार है। एनडीए की इस बार की जीत 2014 के मोदी लहर से भी ज्यादा या कहें कि सुनामी की तरह रही। 

एनडीए ने इस चुनाव में ऐसी जीत हासिल की शायद जिसका अंदाजा उसने खुद भी न किया हो। मोदी की इसबार की सुनामी में विपक्ष पूरी तरह से साफ हो गया। बिहार में तो महागठबंधन के मुख्य घटक राजद का खाता तक नहीं खुल सका। 

आइए आपको बताते है एनडीए की इस बड़ी जीत की क्या रही वजह...... 

पीएम मोदी ने खुद को ही उम्मीदवार पेश किया

दरअसल जब चुनाव की शुरुआत हुई तो बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात लोकल एमपी के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी थी। पार्टी की इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक लोकल सरकार या सांसदों की एंटी इनकंबेंसी से निबटना सबसे बड़ी चुनौती थी। पीएम मोदी ने इसकी काट के लिए हर सीट पर खुद को ही उम्मीदवार के रूप में पेश किया। इसके लिए बीजेपी ने अपने कई वर्तमान सांसदों के टिकट भी काटे और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान आवाम को यह बताया गया है कि आपका वोट किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं मोदी के लिए है। बीजेपी का यह दांव पूरी तरह से काम कर गया। 

जीतेगा तो बीजेपी ही

दूसरी सबसे बड़ी बात यह रही कि बीजेपी ने अपने पूरे कैंपेन के दौरान वोटरों के बीच यह विश्वास दिलाया कि इस बार भी नरेंद्र मोदी की सरकार दोबारा चुनी जा रही है। प्रचार के दौरान दोबारा सरकार में आने पर यह काम होगा की बात की गई। बीजेपी के इस प्रचार-प्रसार के कारण उलझन में रहे वोटर एनडीए के पक्ष में चले गये।  


 विपक्ष को महामिलावट की संज्ञा देना

नरेंद्र मोदी ने विपक्षी गठबंधन को महामिलावट की संज्ञा दी। पूरे कैंपेन के दौरान इस शब्द को पूरी  मजबूती से उछाला गया। मजबूत सरकार बनाम मजबूर सरकार, पूरे कैंपेन का मजबूत हथियार बना। उसपर विपक्षी दलों की उठापटक ने मोदी की बात को कहीं न कहीं कनेक्ट भी किया। साथ ही मोदी नहीं तो कौन, यह सवाल भी बीजेपी ने पूरे कैंपेन में खूब उछाला। बीजेपी ने मोदी के सामने विपक्ष के पीएम उम्मीदवार को सामने लाने की चुनौती दी। बहस इस इर्द-गिर्द घूमी। मोदी नहीं तो कौन, यह बात वोटर के बीच अच्छे से कनेक्ट हुई। विकल्पहीनता की बात भी मोदी के पक्ष में गई।

जीतने वाली सीटों को सबसे पहले किया टारगेट

बीजेपी ने चुनाव से ठीक पहले 120 ऐसी सीटें चुन ली थीं, जो बीजेपी के लिए 50-50 चांस वाली मानी गईं। इसके बाद पीएम मोदी के नेतृत्व में पूरा फोकस उनपर रखा गया। प्रधानमंत्री मोदी ने न सिर्फ इन सभी 120 सीटों पर रैलियां कीं, बल्कि उसके आसपास भी पूरा फोकस किया। खासकर उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 50 से अधिक सीटों पर पीएम मोदी की रैली रखी गई। नतीजों में इसका असर साफ दिखा जब बीजेपी इन 120 में 100 से अधिक सीटें जीतने में सफल रही। 

मोदी है तो मुमकिन है-
 
पूरे कैंपेन के दौरान मोदी ने मजबूत और निर्भीक फैसले लेने वाले नेता के रूप में खुद को पेश किया। कैंपेन का नाम भी दिया- मोदी है तो मुमकिन है। आतंकवाद से लेकर महंगाई तक ऐसे-ऐसे मुद्दों को सामने लाया गया जो अब तक नहीं आए थे। चुनाव के बीच में एंटी मिसाइल सेटेलाइट टेस्ट करने की घटना को भी जनता के बीच उसी तरह पेश किया गया। सीधा और प्रभावी संदेश भी जनता तक पहुंचाने में सफल रहे कि मोदी ही ऐसा कर सकते हैं और वह मजबूरी नहीं बल्कि जरूरी हैं। वह वोटरों के बीच अपने मजबूत फैसलों का हवाला देकर यह विश्वास दिलाने में सफल रहे कि मजबूत नेतृत्व के कारण ही बहुत कुछ हुआ।

 

 

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