काेरोना महामारी के बीच एम्स की नर्स हड़ताल पर, छठवें वेतनमान लागू करने को लेकर प्रबंधन और स्टाफ आमने-सामने

काेरोना महामारी के बीच एम्स की नर्स हड़ताल पर, छठवें वेतनमान लागू करने को लेकर प्रबंधन और स्टाफ आमने-सामने

डेस्क... कोरोना महामारी के बीच एम्स की नर्स हड़ताल पर चली गई हैं। आपको बता दें कि छठे वेतनमान को लेकर करीब 5000 नर्स बेमियादी हड़ताल पर चली गई हैं। नर्सों की हड़ताल से मरीजों के इलाज पर असर हो रहा है। एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि उनकी अधिकतर मांगें मान ली गई हैं और यह वक्त हड़ताल का नहीं है, इसलिए नर्साें को काम पर वापस जाना चाहिए। 

कोरोना महामारी के संक्रमण के बीच देश के सबसे बड़े अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्वैदिक संस्थान के तकरीबन 5000 नर्सिंग स्टाफ अचानक हड़ताल पर चली गई, जिसके चलते अस्पताल में आए मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। रोजाना देशभर के अलग-अलग राज्यों से आए कोरोना के साथ-साथ अगर बात की जाए तो कैंसर, लीवर और हॉट जैसी बड़ी बीमारियों का इलाज कराने के लिए यहां पर आते हैं, नर्साें के हड़ताल पर चले जाने के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

दरअसल जो नर्सिंग स्टाफ हैं वह छठे वेतनमान को लेकर अपनी मांगों पर अड़ा है। जिसको लेकर कि वह लगातार हड़ताल पर हैं, हालांकि इस बीच एम्स के जो निदेशक हैं उन्होंने अपील की है कि जो हड़ताल पर बैठे नर्सिंग स्टाफ वह काम पर लौटें, क्योंकि कोरोना महामारी इस वक्त देश भर के अंदर हैं। वहीं एम्स में आए मरीजों के जो एटेंडेंस हैं उनकाे खासतौर से परेशानी हो रही है। 


हड़ताल पहले 16 दिसंबर से शुरू होने वाली थी। गुलेरिया ने कहा कि नर्स संघ ने 23 मांगें रखी थीं और एम्स प्रशासन तथा सरकार ने उनमें से लगभग सभी मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि एक मांग मूल रूप से छठे वेतन आयोग के मुताबिक शुरुआती वेतन तय करने की विसंगति से जुड़ी हुई है।

एम्स निदेशक ने कहा कि नर्स संघ के साथ कई बैठकें न केवल एम्स प्रशासन की हुई हैं बल्कि स्वास्थ्य मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार, व्यय विभाग के प्रतिनिधियों के साथ भी हुई हैं और जिस व्यक्ति ने छठे सीपीसी का मसौदा तैयार किया वह भी बैठक में मौजूद था। उन्हें बताया गया है कि उसकी व्याख्या सही नहीं है।

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