दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय को हुआ 3 अरब 28 करोड़ का घाटा, सिर्फ एक करोड़ 84 लाख की हुई आमदनी

दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय को हुआ 3 अरब 28 करोड़ का घाटा, सिर्फ एक करोड़ 84 लाख की हुई आमदनी

दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में रविवार को दरबार हॉल में संपन्न हुए 44वीं सीनेट की बैठक में वित्तीय वर्ष 2021-2022 के लिए 3 अरब 27 करोड़ 17 लाख 62 हजार 822 रूपये के घाटे के वार्षिक बजट को अनुमोदित कर दिया गया। बजट में कुल प्रस्तावित खर्चे का अनुमान 3 अरब 29 करोड़ 2 लाख 57 हजार 322 दर्शाया गया है। बजट अधिकारी डॉ. नवीन कुमार झा के अनुसार विश्वविद्यालय की अनुमानित आय महज 1 करोड़ 84 लाख 95 हजार 500 की है।

 इस मौके पर बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. शशिनाथ झा कहा कि संस्कृत एवं संस्कृति के माध्यम से हमारा देश सम्पूर्ण विश्व के चारित्रिक शिक्षा का केन्द्र रहा है। वसुधैव कुटुम्बकम् के साथ स्वदेशो भुवनत्रयम् का उद्घोष करने वाले संस्कृत साहित्य की ओर आज सभी आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशद्रोह, अशांती, आतंकवाद, भ्रष्टाचार, नारी उत्पीड़न समेत अन्य अमानवीय कृत्यों से दूर रखने में इसका साहित्य काफी समर्थ है। उन्होंने कहा कि मातृ देवो भव:, पितृ देवो भव:, आचार्य देवो भव:, आचारह परमो धर्म: समेत सैकड़ों संस्कृत वाक्य मानवाधिकार एवं कर्तव्यों की रक्षा के साथ चारित्रिक विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। कुलपति ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा व साहित्य के प्रति समाज में उदासीनता व्याप्त है, जो हमारी चिंता का व्यापक सबब बना हुआ है। जनता चरित्र शिक्षा के वजाय सिर्फ व्यावसायिक शिक्षा को महत्व देने लगी है। समाज में यह दुर्भावना आम हो गई है कि संस्कृत मात्र पूजा-पाठ की भाषा है। इसमें अर्थोपार्जन की संभावना कम है।

 कुलपति ने महाराजाधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह, तत्कालीन राज्यपाल डॉ. जाकिर हुसैन के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देववाणी संस्कृत के विकास व सम्बर्द्धन के लिए अपपे संकल्पों को दोहराया। कुलपति ने संस्कृत शिक्षा के प्रति छात्रों की संख्या में हो रहे हा्रस पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में नियमित पदाधिकारियों का अभाव एवं शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मियों की घोर कमी से कार्याें पर प्रतिकुल असर पर रहा है। उन्होंने कहा कि महामहिम व राज्य सरकार के दिशा-निर्देशानुसार वैश्विक महामारी के दौरान भी छात्रों के पठन-पाठन को ऑन लाईन, ऑडियो-वीडियो, वेबिनार के माध्यम से जारी रखा गया। कुलपति ने मान्य सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि आप सभी का अपूर्व सहयोग एवं निर्देशन भारत के संस्कृत विश्वविद्यालयों में द्वितीय प्राचीनतम कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय को मिल रहा है। उक्त जानकारी विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क पदाधिकारी निशिकांत  प्रसाद सिंह ने दी।

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