'कुशवाहा' VS आनंद ! BJP का JDU नेता पर बड़ा प्रहार, कहा- शर्म करें...दांत निपोरकर विक्टिम कार्ड खेलना चाह रहे? वाह भाई! चोरी भी और सीनाजोरी भी...

'कुशवाहा' VS आनंद ! BJP का JDU नेता पर बड़ा प्रहार, कहा- शर्म करें...दांत निपोरकर विक्टिम कार्ड खेलना चाह रहे? वाह भाई! चोरी भी और सीनाजोरी भी...

PATNA:  बिहार नगर निकाय चुनाव पर ईबीसी आरक्षण पर पटना हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। पटना हाईकोर्ट ने इन जगहों पर चुनाव कराने पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन किए बिना ही चुनाव करा रही थी। हाईकोर्ट ने कहा कि अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के लिए 20% आरक्षित सीटों को जनरल कर नए सिरे से नोटिफिकेशन जारी करें। पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार की भारी फजीहत हुई है।इसके बाद जेडीयू ने इसे पॉलिटिकल रंग देने की कोशिश की। जेडीयू ने इसके लिए केंद्र सरकार और भाजपा को जिम्मेदार ठहरा दिया। बस क्या था...बीजेपी ने सीएम नीतीश की पोल खोलनी शुरू कर दी। भाजपा ने सीएम नीतीश से पूछा कि क्यों नहीं आयोग का गठन किया गया....आयोग का गठन नहीं कर मुख्यमंत्री ने अति पिछड़े समाज को अपमानित करने का काम किया है।

आमने-सामने जेडीयू और बीजेपी के नेता  

पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद जेडीयू और बीजेपी के नेता आमने-सामने हैं। शुरूआत उपेन्द्र कुशवाहा की तरफ से हुई. इसके बाद करारा जवाब बीजेपी की तरफ से दिया जा रहा है। अब बीजेपी ने उपेन्द्र कुशवाहा पर प्रहार करते हुए कहा है कि जेडीयू नेता अब दांत निपोरकर विक्टिम कार्ड खेलना चाह रहे हैं।भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं बिहार भाजपा प्रवक्ता डॉ० निखिल आनंद ने नगर निकाय चुनाव पर कोर्ट के फैसले के बाद कहा की इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अकर्मण्यता और शिथिलता बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है जो साबित करता है कि सीएम ने जानबूझकर पिछड़ा- अति पिछड़ा को धोखा दिया।

चोरी भी और सीनाजोरी भी ?

निखिल आनंद ने कोर्ट फैसले के बाद नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया बाधित होने पर सीएम नीतीश कुमार से चार सवाल पूछे। पहला, आयोग गठन करने की जिम्मेदारी किसकी थी? दूसरा, बिना तैयारी के चुनाव प्रक्रिया क्यों शुरू किया? तीसरा, बिना तैयारी और तथ्य के कोर्ट में क्यों पक्ष रखने गए? चौथा, इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट के सलाह एवं सुझाव की उपेक्षा क्यों की? निखिल आनंद इस मसले पर जदयू नेताओं के दिए गए बयानों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जेडीयू के लोग भद् पिटवाने के बाद अब छाती पीटने का नाटक कर रहे हैं। जेडीयू के बयानवीर नेतागण शर्म करें कि पिछड़ा- अति पिछड़ा समाज की हकमारी करके अब दांत निपोरकर विक्टिम कार्ड खेलना चाह रहे हैं। यह तो गजब की बात है कि जदयू चोरी करके सीनाजोरी कर रही है। निखिल ने कहा कि नीतीश कुमार की पिछड़ा- अति पिछड़ा विरोधी मानसिकता की पोल खुल गई है और आने वाले दिनों में बिहार का पिछड़ा- अति पिछड़ा समाज इस बेइज्जती का बदला नीतीश कुमार से जरूर लेगी।

कुशवाहा ने केंद्र सरकार पर बोला हमला 

उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा है कि भाजपा थोथी और बेईमानी भरा बयान देकर फिर से अतिपिछड़ों/पिछड़ों की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास कर रही है। कोर्ट कह रहा है कि आयोग बना कर जातीय पिछड़ापन का आंकड़ा जूटाईए और उसका अनुपात बताईए। अरे भाई, इसी के लिए तो जातीय जनगणना की जरूरत है और संविधान के हिसाब से यह काम सिर्फ केन्द्र सरकार करा सकती है राज्य नहीं। राज्य की सरकार इस काम को करवाती है या करवा रही है। इसका उपयोग सिर्फ सरकारी योजनाओं को बनाने में हो सकता है। संवैधानिक मामले में अगर सरकार इसका इस्तेमाल करती है तो फिर कल कोई कोर्ट चला जाएगा और कोर्ट कहेगा कि यह संवैधानिक नहीं है। आखिर वहां भी तो कॉलेजियम सिस्टम ही है।जहां तक भाजपा राज्य सरकार पर दोषारोपण कर रही है, तो वह यह भी बताए कि राज्य में नगर निकाय  चुनाव की प्रक्रिया तो तब शुरू हुई थी  जब यहां एनडीए की सरकार थी और नगर विकास मंत्री भाजपा के ही नेता थे। तब आयोग बनाने की बात कहां भुल गए थे ?


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