ललन सिंह ने दूसरी बार संभाला जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार, नीतीश कुमार के अधूरे सपने को पूरा करने की चुनौती

ललन सिंह ने दूसरी बार संभाला जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार, नीतीश कुमार के अधूरे सपने को पूरा करने की चुनौती

पटना. राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह ने जेडीयू के अध्यक्ष पद का पदभार लगातार दूसरी बार संभाल लिया है. जदयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में शनिवार को जदयू के वरिष्ठ नेता अनिल हेगड़े ने ललन सिंह के नाम का प्रस्ताव रखा और तमाम नेताओं ने ललन सिंह के नाम का समर्थन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ललन सिंह का स्वागत किया. उन्होंने पुष्पगुच्छ भेंटकर ललन सिंह को नई जिम्मेदारी मिलने की बधाई दी. 

ललन सिंह को पिछले वर्ष 31 जुलाई को जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था. जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जगह उन्हें यह जिम्मेवारी दी गयी थी. ललन सिंह के जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से पार्टी में कई प्रकार के बदलाव देखने को मिले. इसमें सबसे बड़े दो बदलावों में आरसीपी सिंह की जदयू से छुट्टी और बिहार में एनडीए से नाता तोड़कर नीतीश कुमार का राजद सहित अन्य दलों वाले महागठबंधन के साथ सरकार बनाना रहा.

ललन सिंह के कार्यकाल में हुए इन दो निर्णयों से जदयू ने सबको चौंका दिया. हालांकि ललन सिंह के कार्यकाल में अभी तक पार्टी ने किसी चुनाव का सामना नहीं किया है. ललन सिंह के लिए इस बार अध्यक्ष बनने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भी रहेगी. इसमें वर्ष 2024 में होने वाला लोकसभा का चुनाव सबसे अहम है. 

जदयू का एनडीए से नाता तोड़कर महागठबंधन संग आना कितना फायदेमंद होता है यह आने वाले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव 2025 में दिखेगा. इसके पूर्व ललन सिंह को बिहार में जदयू के संगठन को सशक्त करना और महागठबंधन संग सामंजस्य बिठाने की चुनौती होगी. साथ ही नीतीश कुमार की विपक्षी एकता के सपने को साकार करने का जिम्मा भी ललन सिंह के कंधों पर होगा. वहीं अगले साल होने वाले कर्नाटक और नागालैंड के विधानसभा चुनाव में जदयू के दमदार प्रदर्शन की परीक्षा ललन सिंह की पहली परीक्षा होगी. 


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