एक बार फिर से JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे ललन सिंह, दिल्ली में करेंगे नामांकन, अब झेलनी होगी सबसे बड़ी चुनौती

एक बार फिर से JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे ललन सिंह, दिल्ली में करेंगे नामांकन, अब झेलनी होगी सबसे बड़ी चुनौती

पटना/ दिल्ली. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह एक बार फिर से किस्मत आजमाएंगे. ललन सिंह अध्यक्ष पद के होने वाले चुनाव के लिए नामांकन करेंगे. ललन सिंह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया आरंभ हो रही है. माना जा रहा है ललन सिंह निर्विरोध पार्टी के अध्यक्ष चुने जाएंगे. निर्वाचन सात दिसंबर को होना है. ललन सिंह को पिछले वर्ष 31 जुलाई को जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था. जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जगह उन्हें यह जिम्मेवारी दी गयी थी.

करीब ढेढ़ साल के बाद जदयू में फिर से ललन सिंह को अध्यक्ष बनाने की तैयारी तेज हो गयी है. पिछले सप्ताह ही 27 नवंबर को जदयू राज्य परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संबोधन के क्रम में कहा था कि उनका यह प्रस्ताव है कि ललन सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेवारी संभालते रहें. मैं प्रस्ताव भी कर दूंगा. नीतीश की इस अपील के बाद से ही यह तय माना जा रहा है कि ललन सिंह फिर से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का जा रहे हैं. उनके नाम की घोषणा होनी सिर्फ औपचारिकता मात्र है. 

ललन सिंह के जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से पार्टी में कई प्रकार के बदलाव देखने को मिले. इसमें सबसे बड़े दो बदलावों में आरसीपी सिंह की जदयू से छुट्टी और बिहार में एनडीए से नाता तोड़कर नीतीश कुमार का राजद सहित अन्य दलों वाले महागठबंधन के साथ सरकार बनाना रहा. ललन सिंह के कार्यकाल में हुए इन दो निर्णयों से जदयू ने सबको चौंका दिया. हालांकि ललन सिंह के कार्यकाल में अभी तक पार्टी ने किसी चुनाव का सामना नहीं किया है. 

कुढ़नी में हो रहे विधानसभा उपचुनाव में पहला मौका है जब जदयू के किसी उम्मीदवार की किस्मत का फैसला होना है. ऐसे में कुढ़नी में जदयू उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करना ललन सिंह के सांगठनिक कौशल की परीक्षा भी है. हालांकि इन सबके बीच राज्य में हुए बड़े राजनीतिक बदलावों के बीच अब ललन सिंह का दोबारा जदयू का अध्यक्ष बनना करीब-करीब तय है. ललन सिंह के लिए इस बार अध्यक्ष बनने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भी रहेगी. इसमें वर्ष 2024 में होने वाला लोकसभा का चुनाव सबसे अहम है. जदयू का एनडीए से नाता तोड़कर महागठबंधन संग आना कितना फायदेमंद होता है यह आने वाले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव 2025 में दिखेगा. इसके पूर्व ललन सिंह को बिहार में जदयू के संगठन को सशक्त करना और महागठबंधन संग सामंजस्य बिठाने की चुनौती होगी. 


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