जमानत याचिका ख़ारिज होने के बाद लालू प्रसाद ने क्यों सुनाई राजा प्रजा की कहानी? पढ़िए पूरी खबर

जमानत याचिका ख़ारिज होने के बाद लालू प्रसाद ने क्यों सुनाई राजा प्रजा की कहानी? पढ़िए पूरी खबर

RANCHI : राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले मामले में जेल की सजा काट रहे हैं. कल उनके जमानत को लेकर झारखण्ड हाईकोर्ट में सुनवाई की गयी. हालाँकि कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मामले को छः सप्ताह के लिए टाल दिया है. इसके बाद लालू प्रसाद यादव ने अपने फेसबुक पेज पर एक राजा और उसके प्रजा की कहानी शेयर की है. इस कहानी के अलग अलग मायने निकाले जा रहे हैं. हालाँकि यह बताना मुश्किल है की लालू प्रसाद ने कहानी के बहाने किस पर कटाक्ष किया है. लालू प्रसाद यादव ने फेसबुक पर लिखा है की 

एक बार एक राजा को ये जानने की दिलचस्पी हुई कि उसकी प्रजा में कौन लोग एक जागरूक और सजग नागरिक हैं और कौन नहीं। उसने अपने सलाहकारों से मंत्रणा की कि आखिर कैसे जागरूक नागरिकों की पहचान की जाए. किसी ने सलाह दी कि आप पूरी प्रजा पर एक रुपये का टैक्स लगा दीजिये और ये टैक्स जमा करना सबके लिए जरूरी कर दीजिए. राजा को ये सलाह अच्छी लगी. राजा ने आदेश जारी कर दिया कि अमुक तिथि तक सभी लोग एक रुपये का टैक्स राजकोष में जमा करे. राजा सोच में था कि कितने लोगों को इस आदेश के बारे में पता चल पाएगा? आखिर कितने लोग इतने जागरूक हैं कि राजा द्वारा लिए गए फैसलों और आदेशों की जानकारी रख सके और उसका पालन कर सके. राजा को ये भी उम्मीद थी कि जो सबसे जागरूक और सजग होंगे. उन्हें न सिर्फ इस आदेश के बारे में पता चलेगा, बल्कि वो हमारे पास फरियाद लेकर भी आएंगे. इस टैक्स को हटाने का उनसे अनुरोध करेंगे. एक दिन बीता. दो दिन बीत गए. तीसरा दिन भी बीत गया. टैक्स तो बहुत लोगों ने भरा, मगर राजा के पास उस टैक्स के विरोध में फरियाद लेकर कोई नहीं आया. राजा ने सोचा कि शायद ये टैक्स बहुत कम है. लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. सब लोग आसानी से ये टैक्स दे पा रहे हैं. फिर राजा ने टैक्स बढ़ा कर दो रुपये कर दिए. मगर, फिर भी लोगों का टैक्स देना बदस्तूर जारी रहा. विरोध का कहीं भी कोई सुर नहीं. कोई फरियाद लेकर नहीं आया राजा के पास. लोगों का टैक्स देना जारी रहा. राजा ने टैक्स बढ़ाकर तीन रुपये, फिर तीन से चार और चार से पांच रुपये कर दिया. मगर फिर भी लोगों का राजकोष में टैक्स देना जारी रहा. हारकर राजा ने फैसला किया कि सभी प्रजा को न सिर्फ पांच रुपये टैक्स देने होंगे, बल्कि टैक्स जमा करने के बाद उन्हें दो कोड़े भी खाने होंगे. कोड़े मारने के लिए सिपाहियों को तैनात किया गया. लोग टैक्स जमा करते थे, दो कोड़े खाते थे और अपने घर जाते थे. राजा इंतजार कर रहा था कि अब लोग उनके पास आएंगे. उनसे फरियाद करेंगे कि महाराजा, प्रजा कराह रही है. ये टैक्स और साथ में ये दो कोड़े खाने का नियम हटाइये. और सच में कुछ लोग राजा के दरबार में पहुंच गए अपनी फरियाद लेकर. राजा ने पूछा बोलो क्या शिकायत है तुम्हारी? उन लोगों ने कहा, महाराज, हमें बहुत परेशानी हो रही है टैक्स देने और कोड़े खाने में. आपने कोड़े मारने के लिए बहुत कम सिपाहियों को नियुक्त किया है और इस वजह से लाइन बहुत लंबी हो जाती है. हम आपके पास ये फरियाद लेकर आये हैं कि आप कोड़े मारने के लिए ज्यादा सिपाहियों को नियुक्त कीजिये ताकि लाइन लंबी न लगे और प्रजा को टैक्स जमा करने और कोड़े खाने में कोई परेशानी न ही.

हालाँकि अंत में लालू प्रसाद ने लिखा है की ये कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है और इसका आज की हालात और हालिया किसी भी घटना से कोई संबंध नहीं है. कोई इसे केंद्र सरकार द्वारा लिए जा रहे टैक्स मान रहा है तो कोई इसे किसान आन्दोलन से जोड़ कर देख रहा है. 


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