लालू-राबड़ी राज में आतंक की 'वो' कहानी, खौफ में रहते थे IAS-IPS अफसर तो आम आदमी की क्या बिसात! पढ़िए 15 साल पहले का 'वो' दौर...

लालू-राबड़ी राज में आतंक की 'वो' कहानी, खौफ में रहते थे IAS-IPS अफसर तो आम आदमी की क्या बिसात! पढ़िए 15 साल पहले का 'वो' दौर...

PATNA: बिहार में एक बार फिर से विधान सभा चुनाव को लेकर जोर-शोर से प्रचार चल रहा है। एक तरफ नीतीश कुमार फिर से सत्ता पाने के लिए जोर लगा रहे हैं वहीं, दूसरी तरफ लालू परिवार 15 साल पहले खोई कुर्सी को प्राप्त करना चाहता है। अब लालू प्रसाद की जगह पर तेजस्वी यादव मोर्चा संभाले हुए हैं। तेजस्वी यादव अपनी रणनीति के तहत लालू राज को याद कराना नहीं चाहते। वे अपने कार्यक्रम में लालू प्रसाद की तस्वीर भी नहीं लगाते। इसके पीछे की की मंशा यही है कि वे पुराना राज यानि अपने अपने माता-पिता के शासनकाल को भूल नई राजनीति शुरू करना चाहते हैं.

आखिर तेजस्वी क्यों नहीं ले रहे नाम? 

दरअसल तेजस्वी यादव ऐसा क्यों कर रहे? आखिर अपनी ही सरकार के कामों का उल्लेख क्यों नहीं करते?लालू-राबड़ी राज को इनकी जगह इनके विरोधी क्यों चर्चा करते हैं? दरअसल माता-पिता के राज पर जो बदनुमा दाग लगे हैं उसे याद कर लोग आज भी सिहर उठते हैं। तब के अखबारों में मोटे-मोटे अक्षरों में जंगलराज की खबर छपती थी। तब आम आदमी की बात छोड़िए आईएएस-आईपीएस अफसर तक सुरक्षित नहीं थे।

आम आदमी की बात छोड़िए आईएएस-आईपीएस नहीं थे सुरक्षित

15 साल पहले बिहार आईएएस-आईपीएस खौफ के साये में जीते थे।जिस राज्य के पुलिस अधिकारी खौफ में हों वहां समझा जा सकता है कैसी शासन व्यवस्था होगी। आज हम आपको तब के अखबारों में छपी अफसरों की खौफ की कहानी बताते हैं।बिहार के बड़े अखबारों में खबर छपती थी राजद के गुंड़ों ने आईएएस और आईपीएस अफसरों को पीट दिया। आज फलां सचिव के चेैंबर में घुस कर पीटा गया। जमुई कांड पर तो राबड़ी देवी ऐसी भड़की कि मंच से ही बोल दीं जमुई के एसपी को नहीं छोडूंगी नहीं. कुछ दिन पहले राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी सिवान डीएम सीके अनिल से बुरी तरह से उलझ गए थे.

लालू के दोनों सालों का था आतंक

तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भाई और राजद विधायक साधु यादव ने परिवहन आयुक्त एनके सिन्हा के चेंबर में घुसकर उनके साथ दुर्व्यवहार किया था, इस मामले पर भारी हंगामा भी हुआ था. आईएएस एसोसिएशन ने सिर्फ विरोध की औपचारिकता पूरी कर डर के मारे चुप्पी साध ली. दूसरे भाई सुभाष यादव ने पटना के सिटी एसपी जगमोहन के साथ खुलेआम दुर्व्यवहार किया था. कार्रवाई के नाम पर सिर्फ यही हुआ कि जगमोहन को पटना से भागना पड़ा. तीसरे भाई प्रभुनाथ यादव पर एक विद्युत अभियंता से मारपीट का आरोप लगा. लालू प्रसाद के एक भाई गोपालगंज में ऐसे ही एक मामले में आरोपी थे. लालू प्रसाद का भतीजा नागेंद्र राय पर तो...... पटना के दो एडीएम गंगाधर लाल और मदन मोहन प्रसाद के साथ दुर्व्यवहार की प्राथमिकी तो दर्ज हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं जो नागेंद्र या दूसरे के लिए नसीहत बने. खुद लालू प्रसाद कई अफसरों से भिड़े. किशोर कुणाल रामचंद्र खान सरीखे कई नाम हैं.

अफसरों की पिटाई का बन गया था रिकार्ड

 बेशक लालू ने नौकरशाही के अवांछित व जनविरोधी मिजाज को दुरुस्त करने की कारगर पहल की. एक हद तक वे सफल भी रहे. नौकरशाही का गुरुर टूटा किंतु यह भी उतनी ही सही बात है कि रवैया बाकी के लिए प्रेरक रहा. वह भी इस हद तक की सत्ताधारी जमात का मामूली आदमी भी अपने स्वार्थों के चक्कर में अफसरों को आंख दिखाने या औकात मुताबिक उससे निपटने में अफसरों से मारपीट का रिकॉर्ड बन गया. कई आईएएस अधिकारियों को भी अपनी सुरक्षा की मांग उठानी पड़ी. राजद की एक नेत्री ने राज्य के तत्कालीन उच्च शिक्षा सचिव केडी सिन्हा को उनके चैंबर में घुसकर दुर्व्यवहार किया. मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी संजय कुमार का तबादला सिर्फ इसलिए कर दिया गया क्योंकि एक राजद नेता के बेटा के साथ उनकी भिड़ंत हुई थी. राजद की विधायक भगवतिया देवी गया के आरक्षी अधीक्षक रविंद्र शंकरण से जुड़ गई उन्होंने चप्पल तान दिया. रणवीर यादव पर बिहार भवन के एक अधिकारी सरदार गोपाल सिंह को धमकाने का आरोप लगा। 

राजद नेता अफसरों पर पीटते थे तो कार्रवाई नहीं भाजपा-जेडीयू नेताओं पर तुरंत एक्शन

जदयू विधायक रामधनी सीने करगहर के बीडियो को पीटा तो राघवेंद्र प्रताप सिंह पर बड़हरा के बीडीओ को पीटने का आरोप. वैशाली एसपी शोभा अहोतकर पर भाजपा विधायक रेनू देवी ने दुर्व्यवहार का आरोप मढ़ा. भाजपा विधायक नित्यानंद राय- शोभा अङोतकर विवाद अरसे तक सुर्खियों में रहा. सबसे ज्यादा कमजोर जाति के अफसर पीटे गए. ऐसे भी कई दृष्टांत हैं कि अगर पीटने वाला विपक्षी पार्टी का रहा तो तत्काल कार्रवाई होती थी और अगर राजद का रहा तब तो कुछ नहीं होता था। पुलिस पर हमला करके एक आरोपी को छुड़ा लेने के मामले के आरोपी सांसद अनवारुल हक 6 महीने तक बेफिक्रे घूमते रहे. उन्होंने तभी आत्मसमर्पण किया जब लालू प्रसाद से उनके रिश्ते बिगड़े. ललित यादव ने तो विधायक के रुप में फरार होने का रिकॉर्ड बना लिया.

मो. शहाबुद्दीन के मामले में तो हद हो गई

 राजद सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के मामले में तो हद हो गई. प्रतापपुर मुठभेड़ के बाद राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी पुलिस अफसरों को शाबाशी देने की बजाय उसकी वर्दी उतार लेने की बात कही. विद्यानंद आयोग सांसद के बचाव का उपाय साबित हुआ. तब के राज में अफसरों को आपस में भी भिड़ने का भी रिकार्ड बना। अरविंद प्रसाद नवादा के जिलाधिकारी थे तत्कालीन विकास आयुक्त ने उन पर ₹250000000 के घोटाले के आरोप लगाए. लालू राबड़ी राज में सबसे अधिक बिहार प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारी प्रताड़ित रहे. सबसे ज्यादा इंजीनियर मारे गए.




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