लालू यादव की वो कहानी जिसके बाद राबड़ी देवी उन्हें ‘ईह’ से ‘साहब’ कहकर बुलाने लगी

PATNA: लालू यादव का वर्तमान जैसा भी हो, हो सकता है होटवार की सुबह बेहद खुबसूरत ना हो लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब लालू यादव को अपने कमरे से आंगन तक आने में एक घंटा लग जाता था. भीड़ ऐसी मानों उन्हें निगल ले. उस लालू यादव की कहानी बड़ी दिलचस्प है. ये कहानी उस लालू यादव की है जिसने कभी कहा था बिहार में  कोई ‘वाटरलू’ नहीं है यहां सिर्फ ‘लालू’ है.

आज सभी जानते हैं कि लालू यादव को राबड़ी देवी साहेब कहकर बुलाती हैं. लेकिन सोचिए जब लालू यादव पशु चिकित्सा महाविद्यालय में निचले दरजे के कर्मचारी थे, एक टेबल से दूसरे टेबल तक फाइले ढोते थे तब राबड़ी देवी उन्हे क्या कहकर बुलाती होंगी. सवाल लाजमी है तो जान लीजिए उस दौर में लालू यादव अपनी पत्नी की नजर में ‘ईह’(बिहार के गांव में पत्नी अपने पति को इसी नाम से संबोधित करती है) मात्र थे.

1995 में लोगों को तो ऐसा भी लग रहा था कि लालू यादव इस बार चुनाव हार जाएंगे. 1955 बैच के आईएएस अधिकारी रहे टीएन शेषन 1990-96 तक देश के मुख्य चुनाव आयुक्त थे. उस दौर में लालू यादव और टीएन शेषण के बीच मन मुटाव से हर कोई वाकिफ है. जब टीएम शेषण ने अपना चौथा स्थगन आदेश दिल्ली से बिहार सीएम आवास में फैक्स किया तो लालू यादव ने राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को फोन कर खूब खरी खोटी सुनाई थी और कहा कि तुम लोग गरीब के खिलाफ कांस्पीरेसी (जालसाजी) करते हो सब फैक्स फुक्स उड़ा देगें. बिहार में शेषण का प्रभाव कितना हुआ पता नहीं लेकिन लालू यादव ने दोबारा सत्ता हासिल कर ली थी जिसके बाद राबड़ी देवी ने अपने मन में लालू यादव के लिए ‘साहेब’ शब्द चुन लिया था. लालू यादव अब राबड़ी देवी के लिए मात्र ‘ईह’ नहीं थे. क्योकि 1973 में जब राबड़ी देवी मात्र 14 साल की थी और उनकी शादी हुई थी तब लालू यादव ने कोई ऐसा काम भी नहीं किया था कि उन्हें उनकी पत्नी साहेब कहे और शायद ऐसा भी हो कि गांव की 14 साल की लड़की को शब्दों के वजन का अंदाजा न लगा हो. (लालू की अनगिनत कहानी जारी है)

अगले भाग में पढ़िए क्यों फूट फूटकर रोने लगी थी....राबड़ी देवी


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