दिवंगत केदारनाथ पाण्डेय के पुत्र आनंद पुष्कर सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लड़ेंगे चुनाव, कहा शिक्षकों के अधिकार के लिए करेंगे संघर्ष

दिवंगत केदारनाथ पाण्डेय के पुत्र आनंद पुष्कर सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लड़ेंगे चुनाव, कहा शिक्षकों के अधिकार के लिए करेंगे संघर्ष

PATNA : सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव को लेकर प्रख्यात शिक्षक नेता केदारनाथ पांडेय के पुत्र आनंद पुष्कर 6 नवंबर से लगातार छपरा, सीवान, गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी में घूम रहे हैं। प्रत्येक विद्यालय में जाकर सभी शिक्षकों से मुलाकात कर मूल समस्याओं को जानने की कोशिश लगातार कर रहे हैं। उन्होंने कहा की हमारे पिताजी भी बराबर इस बात की चर्चा करते थे कि हमारा दो परिवार है। एक परिवार जो कि हमारे घर में हैं और दूसरा परिवार शिक्षक समाज है। जिसके लिए उनका जीवन पूरा समर्पित रहा है। शिक्षकों के मूलभूत जो भी समस्याएं रही हैं। उस समस्या का निराकरण ही कराना हमारा प्रथम दायित्व है।

उन्होंने कहा की हमने भी अपने पिताजी को वचन दिया था कि जो भी आपके अधूरे कार्य रहे हैं जो अधूरे संकल्प रह गए हैं। उस संकल्प को पूरा करना मेरा सबसे बड़ा दायित्व है। शिक्षकों को हक पिताजी ने दिलाई जिसमें मुख्यमंत्री जी की भी अहम भूमिका रही है। लेकिन अभी भी कई चीजें बाकी रह गई है। जिसमें सबसे बड़ी समस्या पंचायती राज्यव्यवस्था से अलग कर राज्य कर्मी का दर्जा मिले। इस पर लगातार व कार्य कर रहे थे। उनका यह कार्य शेष रह गया है। पुराने पेंशन को लागू करना और भी कई समस्या शेष रह गया है। जिसका पूरा करना मेरा कर्तव्य है।

पुष्कर ने कहा की वित्त रहित शिक्षकों के अनुदान विगत कई वर्षों से लंबित पड़े हुए हैं। हम लोगों की मांग रही है कि अनुदान लागू हो। वित्त रहित अनुदान के लिए आनंद किशोर जी से मिला और उनसे कहा भी कि 8 वर्षों से लंबित अनुदान पड़े हुए हैं। यथाशीघ्र अनुदान उसे देना चाहिए। शिक्षकों की स्थिति बहुत ही खराब हो रही है और भी छोटी बड़ी समस्याएं है। उन समस्याओं का निराकरण कराने का भरपूर प्रयास हमारा रहेगा।  हमारे पिता जिस तरीके से उन्होंने लड़ा है। वही लड़ाई मैं भी लड़ लूंगा। उनका ही खून हमारे अंदर है। मैं पुराने शिक्षकों को भी संघर्ष करते हुए देख रहा हूं और नए को भी।  मेरी परवरिश वही हुई है।

आनंद पुष्कर ने कहा की सरकार ने भी एक योजना बनाई थी। दीर्घकालीन प्लान था जिसमें शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा देना था। राज्य सरकार ने भी कहा था कि जब पंचायती राज व्यवस्था से शिक्षक अलग हो जाएंगे तो सारी समस्याओं सारी समस्याएं उनकी खत्म हो जाएगी। शिक्षकों को सम्मान मिलना यह सबसे बड़ा चीज है। इस की लड़ाई हमारे पिताजी भी लड़ते रहें और वही लड़ाई हम भी लड़ेंगे। राज्य में शिक्षा पर सरकार को जीडीपी राशि बढ़ाना चाहिए। इसकी भी हम लोग मांग करते हैं कि 6% राशि भी पूरी खर्च नहीं हो पाती है तो शिक्षा पर सरकार का बजट भी बढ़ना चाहिए। देश लेवल पर भी यह बजट बढ़ाने की भी बात हम लोग करते हैं और मांग भी करते हैं कि देश भर में शिक्षा पर बजट बढ़ना चाहिए। चाहे किसी की भी सरकार हो। सभी शिक्षकों को सम्मान मिलना चाहिए। मेरे अंदर जितना भी दम है बल है सड़क से लेकर सदन तक शिक्षकों की लड़ाई लड़ते रहूंगा और पिताजी के जो भी सपने रहे उसे मैं अवश्य पूरा करूंगा। 

वंदना शर्मा की रिपोर्ट

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