आतंकवादियों के चंगुल से मुक्त होकर स्वदेश लौटा मुन्ना चौहान, परिजनों की आँखों में छलके ख़ुशी के आँसू

आतंकवादियों के चंगुल से मुक्त होकर स्वदेश लौटा मुन्ना चौहान, परिजनों की आँखों में छलके ख़ुशी के आँसू

KUSHINAGAR : खड्डा क्षेत्र के निवासी मुन्ना चौहान का फिरौती के लिए लीबिया में आतंकवादियों द्वारा अपहरण कर लिया गया था. इस घटना के बाद मुन्ना अपने घर पहुंचे तो परिजनों के आँखों से खुशी के आंसू आंसू छलक पड़े. मुन्ना ने भारत सरकार, सांसद तथा कंपनी मालिक को धन्यवाद दिया. 

बताते चलें की खडडा के गढ़हिया बसंतपुर गांव निवासी मुन्ना चौहान गुरुवार को अपने घर पहुंचे. यहाँ आने के बाद मुन्ना ने आपबीती लोगों को बताया. उन्होंने बताया की एक साल पहले कतर की एक कंपनी में कार्य करने के लिए रवाना हुए थे. कतर पहुंचने पर पता चला कि 2 माह के लिए लीबिया के एक कंपनी में काम करने के लिए जाना है. इसके बाद मुन्ना लीबिया के बेंगाजी स्थित कंपनी अलसोला अलमुडिया में काम करने पहुँचे. जहाँ धीरे धीरे एक साल से ज्यादा समय तक काम किया. कोरोना महामारी व वीजा समाप्ति होने के चलते मुन्ना व देवरिया जनपद के महेन्द्र सिंह, बिहार के बगहा के अजय शाह, गुजरात के इब्राहिम मुल्तानी, आंध्रप्रदेश के धनैया, वैकटराव, जोगाराव 13 सितम्बर को घर वापसी के लिए टेक्सी से चौदह सौ किलोमीटर दूर लीबिया की राजधानी त्रिपोली हवाई जहाज पकड़ने निकले थे. इसी दौरान 14सि तम्बर को सबा शहर के पास हथियारबंद तीन आतंकवादियों ने उनका अपहरण कर लिया था. जिसके बाद कंपनी ने फिरौती देकर सभी को मुक्त करा लिया  था. उसके बाद सरकार ने अपने खर्च पर सातों भारतीयों को स्वदेश वापस बुलाकर उनके घर भेजवाया है. 


छूट गयी थी जीवन की आस 

मुन्ना ने बताया कि बेंगाजी शहर से टेक्सी पर सातों लोग सवार होकर चौदह सौ किलोमीटर दूर त्रिपोली हवाई अड्डा चले थे. लगभग एक हजार किलोमीटर दूर( सबा)शहर के पास रात्रि में विश्राम करने के बाद 14सितम्बर की सुबह जैसे ही त्रिपोली के रास्ते में बढे थे. तभी सेना की वर्दी पहने एक वाहन ने ओवरटेक कर मुन्ना के गाड़ी को हथियार के बल पर रोक लिया और सातों भारतीयों का हाथ वायर से बांधकर कब्जे में कर लिया. टेक्सी चालक को भी कब्जे में लेकर हथियारबंद लोग चार घंटे तक वाहन से सफर कर एक घर में ले जाकर एक कमरे में बंद कर दिया गया. दो दिन तक कब्जे में रखने के बाद सभी को हमजा नाम के आतंकी गुट को सौप दिया. हमजा ने सभी को एक घर में बंद कर दिया. यहाँ पहले से दो लोग दूसरे देश के बंधक बनाए गये थे. अपहरण  करने वालो ने किसी प्रकार का मारपीट नहीं किया. समय से भोजन मिलता था. बीच में एक दिन आतंकवादियों ने फोन से देवरिया के महेन्द्र सिंह के घर बात कराया तो अपहरण की जानकारी परिजनो को मिली. आतंकवादियों ने कंपनी अलसोला अलमुडिया कंपनी के मालिक से संपर्क कर फिरौती की मांग की. मालिक ने मुन्ना सहित भारतीयों को आश्वासन दिया कि सभी को छुड़ा लिया जाएगा. दस अक्टूबर को रात में हमजा पहुँचा और सभी को रिहा करते हुए कंपनी मालिक के रिश्तेदार को सौप दिया. इसके बाद सभी को अलसोला अलमुडिया कंपनी ले जाया गया. तब जाकर जान मे जान आयी. मुन्ना ने कहा कि अपहरण होने की जानकारी हुई तो लगा कि अब परिवार से मुलाकात नहीं हो पाएगी. भारत सरकार व कंपनी मालिक मूसा, सांसद विजय दूबे सहित सभी सभी लोगों के प्रति मुन्ना व उनके परिवार ने आभार प्रकट किया है.  


जब मुन्ना पत्नी से मिला  

जब मुन्ना लीबिया से घर लौटे व पत्नी से पहली नजर मिली तो दोनों के लिए कुछ देर तक समय ठहर गया. दोनों एक दूसरे को कुछ क्षण तक अपलक निहारते रहे. मुन्ना की पत्नी संजू के आंखो में सुहाग के वापसी पर खुशी के आंसू निकल रहे थे. पति के अपहरण होने की जानकारी मिलने के बाद से ही तमाम देवी देवताओं के दर पर सर पटक रही संजू ने कहा कि दिवाली से पहले ही हमारे परिवार की दिवाली हो गयी है. अपने सुहाग को सही सलामत देख जो खुशी मिल रही है उसका वर्णन नहीं किया जा सकता है. मुन्ना ने कहा कि अपने देश अपने परिवार में आकर लग रहा है कि दूसरा जीवन मिला है. इस क्षण का शिद्दत से इंतजार कर रहा था. 

कुशीनगर से विद्या बाबा की रिपोर्ट 

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