लीची, गर्मी या कुछ और है चमकी बुखार का कारण, बहुत जल्द चल जायेगा पता, जानिए कैसे?

लीची, गर्मी या कुछ और है चमकी बुखार का कारण, बहुत जल्द चल जायेगा पता, जानिए कैसे?

NEWS4NATION DESK : बिहार में चमकी बुखार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस बीमारी से अब तक बिहार में 146 बच्चों की जान जा चुकी है. बच्चों की यह मौत 1993 के बाद सबसे अधिक बताई जा रही है. तमाम कोशिशों और रिसर्च के बाद भी अब तक इस बीमारी के कारणों का पता नहीं चल पाया है. बिहार के मुज़फ्फरपुर और इसके आसपास के इलाकों में यह बीमारी हर साल मई के महीने में होती है. यह बीमारी जुलाई के महीने तक चलती है. बरसात शुरू होने के बाद यह बीमारी खुद समाप्त हो जाती है. 

इस मामले पर भी रिसर्च की जरुरत है. इस बीमारी के चपेट में आये अधिकतर बच्चे कुपोषण के शिकार होते हैं. अध्ययन में इस विषय को भी शामिल किया जायेगा. इन सब कारणों से इस बीमारी को अब तक अज्ञात श्रेणी में रखा गया है. लेकिन अब बहुत जल्द ही इस बीमारी के कारणों का पता चल जायेगा. 

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानि एम्स इस बीमारी का कारणों का पता करने के लिए अध्ययन करेगा. अगले महीने से इस पर रिसर्च शुरू किया जायेगा. रिसर्च को केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और इंडिया इंफ़्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (IIFCL) ने वित्त पोषित किया है. इस रिसर्च में डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, दाद, जापानी बी एन्सेफलाइटिस, मेनिन्जाइटिस, ई कोलाई, एच इन्फ्लूएंजा, निमोनिया जैसे वायरस का भी अध्ययन किया जाएगा. बताते चले की इस बीमारी एक साल से लेकर 18 साल तक के बच्चे प्रभावित होते हैं.

लीची को लेकर संशय 

चमकी बुखार को लेकर लीची को भी संदेह की नजर से देखा जाता है. एईएस से प्रभावित होने वाले बच्चे अधिकतर बच्चे कुपोषण के शिकार होते हैं. भूख मिटाने के लिए बच्चे लीची खाने के लिए खेत में जाते हैं. वे बिना पके फल भी खाते हैं. डॉक्टर बताते हैं की बिना पके लीची के फल में टोक्सिन की मात्रा होती है. शरीर में टोक्सिन की मात्रा शुगर को कम कर सकता है. ऐसे बच्चों में ग्लाइकोजन रिजर्व नहीं होता है. इसी तरह गर्मी के मौसम में लीची में पानी की कमी हो जाती है. हालाँकि अभी तक चमकी बुखार के लिए लीची को दोषी नहीं माना गया है.    

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