Mercedes से भी कीमती है ये 2.30 करोड़ की छिपकली, बिहार से तस्कर ले जा रहे थे नेपाल

Mercedes से भी कीमती है ये 2.30 करोड़ की छिपकली, बिहार से तस्कर ले जा रहे थे नेपाल

N4N Desk: मर्सिडीज व बीएमडब्‍ल्‍यू जैसे गाड़ी का शौक हर किसी को होता है लेकिन उसे पूरा बहुत कम ही लोग कर पाते है. क्‍या आप जानते हैं कि कीमत के नाम पर एक छिपकली इन्हें टक्कर देने वाली है. दुनिया में एक ऐसी छिपकली भी है, जिसकी कीमत मर्सिडीज व बीएमडब्‍ल्‍यू लग्‍जरी कारों से भी ज्यादा है. इसका उपयोग दवाओं के निर्माण में होता है. बिहार के किशनगंज में इस छिपकली की तस्करी का भंडाफोड़ हुआ है.


इस छिपकली का नाम ‘गीको’ या ‘टोको’ छिपकली है. किशनगंज सीमा से सटे बंगाल क्षेत्र में एसएसबी ने टोको छिपकली के साथ एक तस्करों को गिरफ्तार किया है। इस छिपकली की कीमत तकरीबन 2.5 करोड़ रुपये है. ये गिरफ्तारी एसएसबी 41वीं बटालियन के असिस्टेन्ट कमांडेंट एम एस रीना के नेतृत्व में की गई. किशनगंज सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के भारत-नेपाल अंतराष्ट्रीय सीमा पर पहुंचने से पहले ही नक्सलबाड़ी बस स्टेंड से तस्कर को छिपकली के साथ दबोच लिया.

इस छिपकली के उपयोग से डायबिटीज, एड्स और कैंसर की परंपरागत दवाएं बनाई जाती हैं. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में इसकी बेहद मांग है. चीन में भी चाइनीज ट्रेडिशनल मेडिसिन में इसका उपयोग किया जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऐसी एक छिपकली की कीमत एक करोड़ रुपये तक है. यह छिपकली दक्षिण-पूर्व एशिया, बिहार, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, पूर्वोत्तर भारत, फिलीपींस तथा नेपाल में पाई जाती है. जंगलों की लगातार कटाई होने की वजह से यह खत्म होती जा रही है. बरामद इन पांच छिपकलियों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में ढ़ाई करोड़ से अधिक बताई जा रही है. अब तक कई बार एसएसबी ने जिले में टोके छिपकली के साथ तस्कर को गिरफ्तार किया है.

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