लोजपा ने 2005 में बिहार को पहुंचाया था जबरदस्त राजनीतिक चोट, सूबे को जबरन ढकेल दिया था मध्यावधि चुनाव में....

लोजपा ने 2005 में बिहार को पहुंचाया था जबरदस्त राजनीतिक चोट, सूबे को जबरन ढकेल दिया था मध्यावधि चुनाव में....

PATNA: चिराग पासवान ने एनडीए से अलग होकर अपने दम पर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ रही है। लोजपा की पूरी कोशिश है कि इस बार नीतीश कुमार सत्ता में आने से रोकना। चिराग इस बार के चुनाव में हिडेन एजेंडा पर चल रहे हैं। लेकिन कहीं न कहीं उनका जो गुप्त एजेंडा है वो बाहर आ गया है। चिराग बार-बार अपने को पीएम मोदी का हनुमान साबित करने में जुटे हैं।वहीं दूसरी तरफ वे बीजेपी प्रत्याशी के खिलाफ अपना कैंडिडेट भी दिए हुए हैं। तेजस्वी यादव के खिलाफ प्रत्याशी देकर चिराग ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है कि आखिर वे चाहते क्या हैं। जानकार बताते हैं कि उनकी मंशा यही है कि वोट काटकर नीतीश कुमार को सत्ता में आने से रोकना और तेजस्वी के लिए राह आसान करना है।चिराग यह काम बखूबी कर भी रहे हैं. 2005 में भी लोजपा की वजह से बिहार में मध्यावधि चुनाव कराने पड़े थे। तब रामविलास पासवान सत्ता की चाबी लेकर उड़ गए थे। इस वजह से बिहार में फिर से चुनाव कराना पड़ा और जनता की गाढ़ी कमाई चुनाव में बर्बाद हुआ. सूबे को जबरन मध्यावधि चुनाव में ढकेलने के मुख्य नायक 'पासवान' ही थे।

तब सत्ता की चाबी लेकर उड़ गए थे पासवान

साल 2005 के फरवरी-मार्च में बिहार में विधानसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव से ठीक पहले रामविलास पासवान ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार से इस्तीफा देकर अपनी पार्टी लोक जनशक्ति बना ली थी और चुनाव में अकेले उतर गए थे। उस दौरान नीतीश कुमार और बीजेपी मिलकर लालू फैमिली की सरकार उखाड़ने की मुहिम में जुटे थे। नीतीश कुमार चाहते थे कि रामविलास पासवान उनके साथ रहें ताकि इस मुहिम को बल मिले, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। रामविलास पासवान अलग हो गए और अकेले चुनाव मैदान में उतरे।  चुनाव परिणाम आने के बाद बिहार की जनता ने सत्ता की चाभी रामविलास पासवान को सौंप दी थी। उनकी पार्टी एलजेपी को 29 सीटें आई थीं। नीतीश कुमार ने एक बार फिर रामविलास पासवान से अप्रोच किया कि वह उनके साथ आकर सरकार बनाएं और चलाएं। लेकिन रामविलास पासवान अपनी जिद्द पर अड़े रहे।

स्थायी सरकार बनने में बाधक बने थे पासवान

 रामविलास पासवान राज्य में मुस्लिम मुख्यमंत्री की डिमांड पर ना नीतीश और ना लालू फैमिली को समर्थन दिया।लिहाजा चुनाव होने के बाद भी बिहार में स्थाई सरकार नहीं बन पाई। इसी बीच खबर आईं कि रामविलास पासवान के 20 से अधिक विधायक टूटकर नीतीश कुमार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। नीतीश ने भले ही रामविलास पासवान की पार्टी के विधायकों को अपने साथ नहीं लिया, लेकिन उनकी पार्टी में तोड़फोड़ की हुई कोशिश से वह काफी आहत हुए।

पासवान की जिद्द की वजह से बिहार में हुए थे मध्यावधि चुनाव

 रामविलास पासवान की जिद्द के चलते बिहार में किसी भी दल की सरकार नहीं बन पाई, जिसके बाद 2005 अक्टूबर-नवंबर में मध्यावधि चुनाव हुए। बीजेपी व जेडीयू की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। एलजेपी बड़ी मुश्किल से 10 सीटें जीत पाई।कहां फऱवरी में हुए चुनाव में पासवान को 29 सीटें मिली और 6 महीने में ही बिहार की जनता ने लोजपा को उसकी वास्तविक हैसियत बता दी। लोजपा की वजह से बिहार में फिर से चुनाव कराना पड़ा और जनता पर बिना मतलब का बोझ डाला गया। रामविलास पासवान की जिद्द की वजह से तब 6 महीनों तक बिहार में स्थायी सरकार नहीं बन पाई और सूबे का विकास बाधित रहा।



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