धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर बना रहे हैं मां सरस्वती जी की प्रतिमा, मगध मेडिकल कॉलेज में होगी पूजा

धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर बना रहे हैं मां सरस्वती जी की प्रतिमा, मगध मेडिकल कॉलेज में होगी पूजा

GAYA. ये पेशे से मूर्तिकलाकार नही,बल्कि ये डॉक्टर है, पर माँ सरस्वती की प्रति सच्ची श्रद्धा ने इन्हें भी कलाकार बना दिया, या कहें कि इनके एक हाथ से मरीजो की जान बचाते है तो दूसरे हाथ से मां के आशीर्वाद से मरीज ठीक भी हो जाते हैं।

जी हां गया रेलवे अनुमण्डल अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर प्रदीप कुमार इको फ्रेंडली मां सरस्वती की प्रतिमा अपने हाथों से बना रहे जो लोग के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, इस बार डॉक्टर 10 फिट की माँ सरस्वती की प्रतिमा  अपने हाथों से बना रहे है,और इस प्रतिमा को अनुग्रह नारायण  मगध मेडिकल अस्पताल में होने वाले सरस्वती पूजा के आयोजन स्थापित किया जाएगा। वे मरीज को देखने के बाद समय निकाल कर 4 से 5 घंटे प्रतिमा बनाने में जुट जाते है, वहीं अन्य डॉक्टर भी प्रशंसना करते नही थकते।

डॉ प्रदीप कुमार बताते हैं कि अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज से निकलकर रेलवे अस्पताल में नौकरी लगी है। मगध मेडिकल में मैंने कई बार सरस्वती जी की प्रतिमा को अपने हाथों से बनाया था और उस प्रतिमा को मगध मेडिकल में पूजा की जाती थी लेकिन इस बार जब मुझे नौकरी मिल गई तो एक बार फिर  जूनियर डॉक्टरों के द्वारा मूर्ति बनाने के लिए बोला गया था जिसके बाद हम मूर्ति बनाना शुरू कर दिए यह प्रतिमा  पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाएंगे, हर साल मगध मेडिकल में परिसर में प्रतिमा बनाते थे लेकिन जगह नही मिलने के कारण बागेश्वरी मोहल्ले में अपने दोस्त के घर प्रतिमा बना रहे है, उन्होंने बताया कि मां सरस्वती की प्रतिमा में वह क्ले मिट्टी, गंगा नदी की मिट्टी का प्रयोग कर रहे हैं, मूर्ति के लिए लोकल बाजार में मिलने वाले खतरनाक केमिकल वाले रंगों का प्रयोग नहीं किया जा रहा है इसके बदले उन्होंने कोलकाता से इको फ्रेंडली कलर मंगवाया है। 

प्रदीप ने बताया कि मूर्ति में लोहे का कील का प्रयोग ना के बराबर किया गया है, प्रतिमा में कील का प्रयोग करने से विसर्जन के दौरान पानी में रहे जीव जंतु उसे खाना समझ कर निगल हैं जिसके बाद उसकी मौत हो जाती है इको फ्रेंडली प्रतिमा को बनाने से तालाबों में विसर्जन करने के बाद पानी प्रदूषित भी नहीं होती है और जीव-जंतु को भी कोई कठिनाई नहीं होती है। डॉक्टर प्रदीप कुमार ने बताया कि मूर्ति कला में उन्हें बचपन से ही शौक था बचपन से ही जब गांव में मूर्ति बैठती थी तो हम खुद से ही प्रतिमा का निर्माण करते थे उन्होंने बताया कि मरीज देखने का ड्यूटी खत्म होने के बाद 5 से 6 घंटा प्रतिमा बनाने के लिए काम करते हैं।

वही उनके दोस्त ने बताया कि हर बार मगध मेडिकल अस्पताल में सरस्वती जी की प्रतिमा को स्थापित करते थे। इस बार उन्हें रेलवे में जॉब लग गया है फिर भी जूनियर डॉक्टरों के कहने पर उन्होंने समय निकालकर सरस्वती जी की प्रतिमा बना रहे हैं काफी अच्छा लग रहा है। सभी का एक हॉबी होता है लेकिन डॉक्टर प्रदीप का हॉबी हो गई है और दोनों हॉबी में यह महारत हासिल कर चुके हैं।


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