RLSP में माधव आनंद ने फिर संभाली राष्ट्रीय प्रधान महासचिव का पद, चुनाव से ठीक पहले दिया था इस्तीफा

RLSP में माधव आनंद ने फिर संभाली राष्ट्रीय प्रधान महासचिव का पद, चुनाव से ठीक पहले दिया था इस्तीफा

PATNA: उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी के प्रधान महासचिव रहे माधव आऩंद फिर से एक्टिव हो गए हैं। उऩ्होंने एक बार फिर से प्रधान महासचिव का पद संभाल लिया है। निजी और पारिवारिक कारणों की  वजह से पिछले डेढ़ महीने से सक्रिय राजनीति से  माधव आनंद ने खुद को अलग कर लिया था। अब एक बार फिर माधव आनंद बिहार की सक्रिय राजनीति में अपनी कदम रख दी है।

माधव आनंद , उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाली RLSP के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव का जिम्मा फिर से संभाल लिया है।चुनाव से पहले वे इस पार्टी में वह नंबर दो की हैसियत रखते थें और पार्टी के ज्यादातर फैसलों पर इनकी फुट प्रिंट भी दिखती थी। अब फिर से वे पुरानी जिम्मेदारी को संभाल ली है। जानकार बताते हैं कि आरएलएसपी में  माधव आनंद की भूमिका  चाणक्य की तरह है. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कुशवाहा को एनडीए में वापसी का मार्ग काफी हद तक प्रशस्त कर दिया था। लेकिन आखिरी दौर में सीटों को लेकर  बातचीत अंजाम तक नही पहुच पायी। नतीजा उपेंद्र कुशवाहा को बीएसपी और दूसरे दलों के साथ एक गठबंधन तैयार कर चुनावी मैदान में उतरना पड़ा ।उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को चुनाव में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी।

माधव आनंद की आरएलएसपी में बड़ी भूमिका

अब जब फिर से माधव आनंद ने आरएलएसपी में प्रधान महासचिव की जिम्मेदारी सक्रिय रूप से संभाली है तो एक बार फिर से बिहार की राजनीति में कयासों का दौर शुरू हो गया है ।फिर से राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल निकली है कि क्या उपेंद्र कुशवाहा की एनडीए में वापसी तो नही हो रही है? क्या उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार के बीच दो मुलाकातों के पीछे कहीं माधव आनंद की भूमिका तो नहीं है?क्या माधव आनंद एक बार फिर से उपेंद्र कुशवाहा को नीतीश कुमार के करीब लाने की कोशिश तो नही कर रहे हैं? बिहार की राजनीति में उपेंद्र कुशवाहा को लेकर कई तरह के सवाल हैं.


बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम ने यह साबित कर दिया है कि नीतीश कुमार जो बिहार के मुख्यमंत्री हैं उनकी पार्टी पहले से बहुत कमजोर हो गई है। ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार का एक मंच पर मौजूदगी बिहार की राजनीति के लिए एक नया प्लेटफार्म साबित हो सकता है ।लव और कुश की जोड़ी आने वाले दिनों में कई तरह के कमाल दिखा सकती है। वही दूसरी तरफ नीतीश कुमार को फिर से राजनीतिक तौर पर मजबूत करने में भी मुख्य भूमिका अदा कर सकता है।

चुनाव से ठीक पहले दिया था इस्तीफा

 बिहार चुनाव से ठीक पहले माधव आनंद ने आरएलएसपी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था ।लेकिन पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के कहने पर माधव आनंद एक बार फिर से सक्रिय राजनीति में लौटे है। माधव आनंद की खासियत यह है कि वह जितना मजबूत पकड़ अपने पार्टी के अंदर रखते हैं वहीं दूसरी तरफ दूसरे राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं से भी उनके अच्छे संबंध बताए जाते हैं और इसका फायदा उनकी पार्टी को मिलता है। तभी तो उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए का दामन 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले छोड़ा था तो एनडीए से महागठबंधन के सफर में अहम भूमिका माधव आनंद ने निभाई थी।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या माधव आनंद एक बार फिर से नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा को एक साथ एक मंच पर लाने में कामयाब हो पाएंगे ? क्या उपेंद्र कुशवाहा की फिर से एनडीए में वापसी करा पाएंगे? इसका जवाब तो आने वाले वक़्त में ही मिलेगा लेकिन माधव आनंद की RLSP में वापसी बिहार की राजनीति में नए सिरे से दस्तक जरूर है

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