MADHYA PRADESH: प्रोफेसर साहिबा ने नामी डॉक्टर पति को सोये अवस्था में करंट लगाकर मार डाला, 2 दिनों तक बेडरूम में रखी लाश, कारण जान सन्न रह जाएंगे

MADHYA PRADESH: प्रोफेसर साहिबा ने नामी डॉक्टर पति को सोये अवस्था में करंट लगाकर मार डाला, 2 दिनों तक बेडरूम में रखी लाश, कारण जान सन्न रह जाएंगे

छतरपुर: सूबे के छतरपुर में बहुचर्चित डॉक्टर नीरज पाठक हत्याकांड का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस पूरे कांड के पीछे अवैध संबंध का शक है। इस मामले में पुलिस ने मृतक की प्रोफेसर पत्नी को गिरफ्तार किया है। सबसे अहम यह कि पत्नी ने खुद पुलिस को मौत की खबर की जानकारी दी। जाने पूरी रिपोर्ट

पहले गोली, फिर करंट

दरअसल गत अप्रैल माह में फेमस डॉक्टर नीरज पाठक की हत्या हो गयी थी, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। शुरुआती दौर में ही साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को डॉक्टर की पत्नी प्रोफेसर ममता पाठक पर शक हुआ। जिसके बाद पुलिस ने प्रोफेसर पत्नी को थाने में लाकर पूछताछ शुरु की। पहले तो कातिल पत्नी ने इसे सिरे से नकारा लेकिन बाद में उसने अपने जुर्म को कुबूल कर लिया। प्रोफेसर पत्नी ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि पहले उसने अपने पति के खाने में नींद की गोली मिला दिया, जब वह गहरी नींद में सो गये तो बिजली का करंट देकर हत्या कर दी। 

शव छुपाने का राज जानकर चौंक जायेंगे

आरोपी पत्नी ने पति के मौत होने के बाद शव को दो दिनों तक बेडरूम में ही रखा और एक मई को थाने में जाकर पति की मौत की खबर पुलिस को दी। पूछताछ में ममता ने बताया कि उसने एक वीडियो देखा था, जिसमें यह बताया गया था कि खाने में जहर देने के बाद यदि दो दिनों तक शव को रखा जाये तो पोस्टमार्टम में जहर सामने नहीं आता है। इसलिए 29 अप्रैल को पति की हत्या के बाद शव को घर में छुपा कर रखा ताकि नींद की गोली का साक्ष्य सामने न आये। पुलिस ने आरोपी के पास से बची हुई नींद की गोलियां और करंट लगाने में उपयोग किये गये एक्सटेंशन बोर्ड को बरामद कर लिया है। आरोपी पत्नी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेजा जायेगा। 

मिली जानकारी के अनुसार पिछले बीस सालों से डॉक्टर नीरज पाठक व प्रोफेसर पत्नी के बीच विवाद था। प्रोफेसर पत्नी को शक था कि उनके पति का किसी और महिला से संबंध है, रात में इसलिए वह नींद का इंजेक्शन देते थे, जबकि डॉक्टर का कहना था कि पत्नी की तबियत खराब होने से उसे नींद नहीं आती। इसलिए इंजेक्शन देना पडता है। इन दोनों की तरफ से थाना से लेकर डीजीपी स्तर तक मामला पहुंचा था लेकिन जांच में मामला झूठा साबित हुआ था। पत्नी से परेशान होने के कारण डॉक्टर पाठक ने वीआरएस ले लिया था। 



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