धर्मातरण को गलत नहीं मानते मांझी, कहा - जब अपने नहीं देंगे सम्मान तो दूसरे धर्म में जाना ही सबसे बेहतर

धर्मातरण को गलत नहीं मानते मांझी, कहा - जब अपने नहीं देंगे सम्मान तो दूसरे धर्म में जाना ही सबसे बेहतर

GAYA : पिछले कुछ दिनों से गया में धर्मांतरण का मुद्दा छाया हुआ है। अब इस मामले  को लेकर पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने बड़ी बात कह दी है। उन्होंने हिन्दू धर्म के ठेकेदारों कपर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अपने धर्म के सम्मान नहीं दिया जाएगा, तो लोग दूसरे धर्म की तरफ को अपनाएंगे, यह स्वाभाविक है। मांझी के निशाने पर हिंदू धर्म में आज भी व्याप्त छुआछूत की उन प्रथाएं हैं, जिनके कारण धार्मिक संस्थानो सहित प्रमुख जगहों पर दलितों को हेय दृष्टि से देखा जाता है।   

देश में धर्म को कोई मुद्दा नहीं

मांझी ने कहा कि धर्म को लेकर भेदभाव ही धर्मांतरण का प्रमुख कारण है, जब अपने घर में मान ना मिले तो स्वभाविक है लोग दूसरे घरों में जाएंगे ही, उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन से क्या हिंदुस्तान की एकता पर कोई खतरा है, यह धर्मनिरपेक्ष देश है, मन के अनुसार धर्म पालन करना व प्रचार करने की स्वतंत्रता है, ऐसी स्थिति में कौन कहां जा रहा है यह कोई समस्या का विषय मेरे समझ में नहीं है। 

उन्होंने कहा कि जब अपने घर में मान इज्जत व मर्यादा ना मिले और दूसरे जगह मान इज्जत और मर्यादा मिल रही है तो स्वाभाविक है लोग वहां जाएंगे। घर के मालिक को समझना चाहिए कि आखिर वह क्यों जा रहे हैं, आपके यहां उनका विकास संभव नहीं है आप छुआछूत की बात करते हैं। पूर्व सीएम ने कहा कि जब जब घर लचीला हुआ है तब तब उस धर्म का प्रचार हुआ और जब जब धर्म रिजिढ़ हुआ, तब तब उस धर्म का नाश हुआ है।  उन्होंने यह भी कहा कि जब सीएम किसी मंदिर में जाते हैं तो उसे बाहर निकलने के बाद मंदिर को धो दिया जाता है तो ऐसे में क्या समझा जाए।

उभर कर आ गया दिल का दर्द

धर्म परिवर्तन को लेकर चर्चा के दौरान पूर्व सीएम का छुआछूत को लेकर दर्द भी छलक आया। उन्होंने हिन्दू धर्म में फैले भेदभाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक राज्य का दलित सीएम किसी मंदिर में जाता है और उसके बाहर निकलते ही पूरे मंदिर को धो दिया जाता है। जब तक यह स्थिति रहेगी तो लोग दूसरे धर्म में जाते रहेंगे। 

बता दें कि गया के कुछ पंचायतों में पिछड़ी बस्तियों में लोग तेजी से ईसाई धर्म को अपना रहे हैं। यहां के लोगों का कहना है कि ईसाई धर्म में न सिर्फ सम्मान दिया जा रहा है, बल्कि उनका विकास भी किया जा रहा है। जबकि हिन्दू धर्म में उन्हें मंदिरों में भी जाने की इजाजत नहीं दी जाती है


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