MBA और बी-टेक किया, लेकिन संतुष्टि नहीं मिलने के बाद अब खेती कर रहे हैं दो भाई, बन रहे हैं उदाहरण

MBA और बी-टेक किया, लेकिन संतुष्टि नहीं मिलने के बाद अब खेती कर रहे हैं दो भाई, बन रहे हैं उदाहरण

भागलपुर। आज के इस विपरीत परिस्थिति में कोई भी युवा पढ़ लिख कर खेती करने की सोचता नही है। और ना ही कोई किसान अपने बेटे को पढ़ा लिखा कर खेती करने के लिए कहता है। लेकिन युवाओं के लिए मिसाल कायम किया है पीरपैंती प्रखंड के तमोली गांव के साधारण किसान परिवार के दो सगे भाई रौनक दुबे और रमन दुबे ने। जो इंजिनियरिंग और एमबीए करने के बाद वापस अपने गांव लौट गए और खेती के कारोबार से जुट गए। आज इनके खेतों में उपजाई गई फसल की मांग अमेरिका और कनाडा तक पहुंच गई है।

खेती से जुड़ने का यह बताया कारण

रौनक ने देश के प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई है तो वही रमन ने एमबीए की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद लाखो का पैकेज ठुकरा कर नरेन्द्र मोदी के आत्म निर्भर भारत की प्रेरणा लेकर किसान की बदलाव स्थिति की सुधार खोज को लेकर गांव में जाकर खेती करने की सोची। सबसे पहले उन लोगों ने एग्री फीडर नाम से एक कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराया उसके बाद उन क्षेत्रों में जहां साल में एक आध फसलें उगा करती थी उसमें लेमन ग्रास की खेती की व उसे उपजा कर उसने लेमनग्रास हर्बल चाय बनाया।लेमनग्रास हर्बल टी अपने औषधीय गुण के कारण जाना जाता है। जिसमें एंटीलर्जी एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता है। वही युवाओं ने लेमनग्रास हर्बल पत्तियों के साथ साथ कुछ औषधिय गुण वाले तत्वो को मिलाकर चाय बनाकर बाजार में उतारा तो लोगो को इस चाय का सेवन करने से काफी फायदा महसूस हुआ। 

विदेश तक हो रही है सप्लाई

2018 में लेमन ग्रास टी की खेती से जुड़नेवाले दोनों भाइयों द्वारा तैयार प्रोडक्ट की सप्लाई अब अमेरिका और कनाडा तक पहुंच गई है। भारतीय डाक और कॉरियर के माध्यम से भेजा जा रहा है। उन्हों ने गांव के अन्य किसानों को भी इसकी खेती के लिए प्रेरित कर रहे है। कुछ किसानों ने तो खेती भी शुरू कर दी है।

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