मोतिहारी में एमडीएम घोटाला : विधायक की शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, स्पष्टीकरण मांग मामले को ठंडे बस्ते में डाले अधिकारी

मोतिहारी में एमडीएम घोटाला : विधायक की शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, स्पष्टीकरण मांग मामले को ठंडे बस्ते में डाले अधिकारी

मोतिहारी. सूगैली राजद विधायक ई. शशिभूषण सिंह 5 सितंबर को डीपीओ मध्यान भोजन को पत्र भेजकर स्कूली बच्चों को मिलने वाले एमडीएम में भारी अनियमितता की व कमीशन वसूली की शिकायत की गयी है। विधायक ने पत्र में लिखा कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान एमडीएम चावल वितरण व कमीशन की शिकायत अधिकांस विद्यालयों से मिली। शिक्षकों ने बताया कि पूर्व चावल वितरण संवेदक का अनुज्ञप्ति रद्द होने के बाद भी उसी के संरक्षण में गोदाम से चावल उठाव व वितरण किया जाता है। वेंडर द्वारा भी शिक्षकों को बरगला कर पूरी सामग्री आपूर्ति पर 5 प्रतिशत जीएसटी के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है।

वहीं एमडीएम बीआरपी द्वारा भी स्कूलों से वितरित सामग्री पर 5 प्रतिशत रिश्वत लिया जाता है। विधायक के इतने गंभीर आरोप के बाद भी अधिकारी कर्मी पर इतने मेहरवान है कि विधायक के शिकायत के बाद भी सिर्फ बीआरपी से स्पष्टीकरण की मांग कर फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। विदित हो कि जिला शिक्षा कार्यालय, संवेदक, बीआरपी व स्कूल एचएम के मिली भगत से फरवरी मार्च में कोरोना काल के एमडीएम में बच्चों के मिलने वाले सूखा राशन में करोड़ो का घोटाला का मामला उजागर हुआ था। जिला शिक्षा कार्यालय मामले को दबाने के लिए सिर्फ पताही में 219 किवंतल चावल गबन का प्राथमिकी दर्ज कर गबन की बड़ी खेल को दबाने का प्रयास किया गया।

वहीं मोतिहारी सदर,हरसिद्धि व छौड़ादानों प्रखण्ड के एमडीएम के चावल वितरण का जांच भी डीईओ द्वारा कराया गया। लेकिन आज तक उसपर कोई करवाई नहीं की गयी। उस समय एमडीएम का प्रभार जिला शिक्षा पदाधिकारी के पास ही था। मामला गंभीर होते देख वरीय पदादिकारी ने डीईओ से एमडीएम का प्रभार ले कर डीपीओ को दे दिया गया। ताकि बड़ी गबन के मामला पर पर्दा डाला जा सके। जिला में बच्चों की निवाला का गजब खेल चल रहा है। कुछ विद्यालयों को छोड़ दिया जाय तो कागज में एमडीएम योजना चल रही है। इसका प्रमाण जब भी स्कूल का जांच होता है तो अधिकांश विद्यालय में एमडीएम बंद मिलता है या 200 बच्चों ई उपस्थिति बनती है। वहीं 50 बच्चे उपस्थित होते हैं। बच्चों के निवाला में एचएम, वेंडर, बीआरपी से लेकर जिला शिक्षा कार्यालय तक कमीशन के खेल में शामिल रहते हैं।

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