अग्निवीर में जाति प्रमाणपत्र मांगने पर निशाने पर मोदी सरकार, तेजस्वी को मिला नीतीश और मांझी का साथ

अग्निवीर में जाति प्रमाणपत्र मांगने पर निशाने पर मोदी सरकार, तेजस्वी को मिला नीतीश और मांझी का साथ

पटना. सेना भर्ती की नई योजना अग्निवीर घोषणा के दिन से ही विवाद में है. इसमें अब एक और नया विवाद जुड़ गया है जिस पर विपक्षी दल भड़के हुए हैं. अग्निवीर भर्ती के लिए जाति प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है. इसे लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार से सवाल किया है. बिहार में राजद नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे लेकर केंद्र की मोदी सरकार से बड़ा सवाल किया है. उन्होंने पुछा है कि जब सेना में आरक्षण है ही नहीं तो जाति प्रमाणपत्र की क्या जरूरत है? 

तेजस्वी ने अग्निवीर से जुड़े फॉर्म की प्रति ट्विट करते हुए कहा, जात न पूछो साधु की लेकिन जात पूछो फौजी की. संघ की BJP सरकार जातिगत जनगणना से दूर भागती है लेकिन देश सेवा के लिए जान देने वाले अग्निवीर भाइयों से जाति पूछती है. ये जाति इसलिए पूछ रहे है क्योंकि देश का सबसे बड़ा जातिवादी संगठन RSS बाद में जाति के आधार पर अग्निवीरों की छंटनी करेगा. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद 75 वर्षों तक सेना में ठेके पर “अग्निपथ” व्यवस्था लागू नहीं थी. सेना में भर्ती होने के बाद 75% सैनिकों की छँटनी नहीं होती थी लेकिन संघ की कट्टर जातिवादी सरकार अब जाति/ धर्म देखकर 75% सैनिकों की छँटनी करेगी. सेना में जब आरक्षण है ही नहीं तो जाति प्रमाणपत्र की क्या जरूरत?

वहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हम के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने भी जाति पूछे जाने पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि अग्निवीर में जाति का कॉलम डालकर एक नए विवाद को जन्म दिया गया है. इससे अलग अलग तरह की भ्रांतियां फ़ैल रही है. केंद्र सरकार ने बैठे बिठाये विपक्ष को एक मुद्दा दे दिया है. 

एनडीए में सहयोगी जदयू ने भी इसे लेकर सवाल किया है. जदयू के वरिष्ठ नेता उपेंद्र कुशवाहा ने सवाल किया, माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी, सेना की बहाली में जाति प्रमाण पत्र की क्या जरूरत है, जब इसमें आरक्षण का कोई प्रावधान ही नहीं है. संबंधित विभाग के अधिकारियों को स्पष्टीकरण देना चाहिए.

वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा,  मोदी सरकार का घटिया चेहरा देश के सामने आ चुका है. क्या नरेंद्र मोदी पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों को सेना में भर्ती होने के काबिल नहीं मानते, भारत के इतिहास में पहली बार सेना भर्ती में जाति पूछी जा रही है. मोदी आपको अग्निवीर बनाना है जतिवीर .

इस बीच, जाति प्रमाण पत्र और धर्म प्रमाण पत्र मांगने पर विवाद गहराता देख सेना ने विपक्ष के नेताओं के आरोपों का खंडन करते हुए बयान जारी किया है. सेना के अधिकारियों ने कहा कि सेना की किसी भी भर्ती में पहले भी उम्मीदवारों से जाति प्रमाण पत्र और धर्म प्रमाण पत्र मांगा जाता था. इसे लेकर अग्निपथ योजना में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसके अलावा भारतीय सेना के अधिकारी ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान मरने वाले रंगरूटों और सेवा में शहीद होने वाले सैनिकों के लिए धार्मिक अनुष्ठानों के अनुसार अंतिम संस्कार करने के लिए भी धर्म की जानकारी की आवश्यकता होती है.

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