मोदी सरकार का नया टार्गेट, वर्ष 2022 में 36 सरकारी कंपनियों को बेचने का लक्ष्य है, कई दे रही खूब मुनाफा

मोदी सरकार का नया टार्गेट, वर्ष 2022 में 36 सरकारी कंपनियों को बेचने का लक्ष्य है, कई दे रही खूब मुनाफा

दिल्ली. सरकारी कम्पनियों में विनिवेश और उन्हें निजी हाथों में सौंपने की केंद्र की मोदी सरकार की नीति वर्ष 2022 में भी चालू रहेगी. मोदी सरकार ने इसके लिए अपना नया लक्ष्य भी तय कर लिया है. वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने 36 सरकारी कंपनियों को बेचने का लक्ष्य रखा गया है. 

इसके लिए विनिवेश विभाग ने नए साल के पहले सप्ताह में ही अपनी योजना स्पष्ट कर दी है. विनिवेश विभाग के सचिव तुहिन कांत पांडे कहते हैं कि हम कई सरकारी कंपनियों की बिक्री पर विचार कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि साल के अंत तक यह पूरा हो जाएगा. निजी हाथों में सौंपी जाने वाली कम्पनियों में PDIL और HLL की रणनीतिक बिक्री के नोटिस निकाले जा चुके हैं. वहीं CEL जैसी कंपनी को तो बेच भी दिया गया है. कुछ ऐसी कंपनियां भी हैं जिनका निजीकरण न्यायालय की वजह से रुका हुआ है और कई कंपनियों के निजीकरण के ट्रांजैक्शन को प्रोसेस भी कर दिया गया है.

बाजार जानकारों की मानें तो जिन 36 कम्पनियों को केंद्र ने निजी हाथों में सौपने की योजना बनाई है उनमें से अधिकतर उपक्रम आजादी के बाद के महज कुछ ही सालों में स्थापित हुए थे और उनकी आरंभिक पूंजी महज कुछ करोड़ या कुछ सौ करोड़ रुपयों ही थी. धीरे-धीरे यह उपक्रम बड़े बनते गए. तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को इन उपक्रमों को इसलिए भी स्थापित करना पड़ा था क्योंकि उस दौर के बड़े उद्योग समूह जैसे टाटा बिड़ला ने इन क्षेत्रों में निवेश को अत्यंत जोखिम वाला कदम माना था. हालाँकि देश की जरूरतों के हिसाब से जोखिम के बाद भी केंद्र ने अपने संसाधनों से इन संस्थानों को स्थापित किया. अब इन स्थापित कम्पनियों को जिनमें कई बेहतरीन मुनाफे में हैं उन्हें निजी हाथों में देने की योजना है. इनमें कई पीएसयू तो सरकार को अपने लाभ का एक निश्चित भाग (सामान्यतः 20% से 30% तक) सरकार को डिविडेंड के रूप में दे रही हैं.

वर्ष 2022 में जिन 36 सरकारी कंपनियों को निजी पूंजीपतियों को सौंपा जाना है उनमें प्रोजेक्ट एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (PDIL), इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट (इंडिया) लिमिटेड, ब्रिज और रूफ कंपनी इंडिया लिमिटेड, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL), बीईएमएल लिमिटेड, फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड (सब्सिडियरी), नगरनार स्टील प्लांट ऑफ एनएमडीसी लिमिटेड, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया की यूनिट्स (एलॉय स्टील प्लांट, दुर्गापुर स्टील प्लांट, सालेम स्टील प्लांट, भद्रावती स्टील प्लांट),पवन हंस लिमिटेड, एयर इंडिया और इसकी 5 सब्सिडियरी कंपनियां, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड, इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड, द शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड, आईडीबीआई बैंक, इंडिया टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपरेशन लिमिटेड की तमाम यूनिट, हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड, बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड, हिंदुस्तान न्यूजप्रिंट लिमिटेड (सब्सिडियरी), कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड, हिंदुस्तान फ्लोरोकार्बन्स लिमिटेड (सब्सिडियरी), स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड, हिंदुस्तान प्रीफैब लिमिटेड, सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की यूनिट्स, हिंदुस्तान पेट्रोलियन कॉरपोरेशन लिमिटेड, रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड, एचएससीसी (इंडिया) लिमिटेड, नेशनल प्रोजेक्ट्स कंसट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड, ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड, नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और कमरजार पोर्ट लिमिटेड. 


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