1400 बच्चों की अम्मा का निधन, राष्ट्रपति और पीएम मोदी ने भी जताया शोक, पढ़िए कौन थी सिंधुताई

1400 बच्चों की अम्मा का निधन, राष्ट्रपति और पीएम मोदी ने भी जताया शोक, पढ़िए कौन थी सिंधुताई

दिल्ली. भारत में अनाथों की अम्मा के नाम से प्रसिद्ध डॉ सिंधुताई सपकाल का मंगलवार को निधन हो गया. वह 73 वर्ष की थी और उनका जन्म 14 नवंबर 1948 को महाराष्ट्र के वर्धा में हुई थी. सिंधुताई ने अपने जीवन में 1400 से अधिक बच्चों को अपनाया. वह सभी बच्चों को बच्चा मानती थी. अपने जीवन काल में उन्होंने सबको एक परिवार की भांति जोड़कर रखा. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिंधुताई के परिवार में उनके 207 जमाई है, 36 बहुएं हैं और 1000 से अधिक पोते-पोतियां हैं. उनके इसी सेवा कार्यो के कारण उन्हें अनाथों की अम्मा कहा जाता था. 

सिंधुताई के सेवा कार्यों को देखते हुए वर्ष 2021 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया था. सिंधुताई के निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शोक जताया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी सेवाओं का स्मरण करते हुए ट्वीट किया, डॉ. सिंधुताई सपकाल को समाज के लिए उनकी नेक सेवा के लिए याद किया जाएगा. उनके प्रयासों के कारण, कई बच्चे बेहतर गुणवत्तापूर्ण जीवन व्यतीत कर सके. उन्होंने हाशिए के समुदायों के बीच भी बहुत काम किया. उनके निधन से आहत हूं. उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना.

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने ट्वीट कर कहा कि उनके निधन से महाराष्ट्र ने एक मां खो दी है. वह विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए बड़ी हुईं और उन्होंने अपना जीवन उन लोगों को समर्पित कर दिया, जिन्हें समाज ने खारिज कर दिया था. 

महाराष्ट्र के वर्धा में एक गरीब परिवार में जन्मी सिंधुताई को बेटी होने के कारण लंबे समय तक भेदभाव झेलना पड़ा था. उनकी मां उनके स्कूल जाने के विरोध में थीं. हालांकि उनके पिता चाहते थे कि वह पढ़ें. 12 साल की उम्र में उनकी शादी जिससे हुई वह व्यक्ति उनसे 20 साल बड़ा था. सिंधुताई का पति उन्हें प्रताड़ित करता और मारपीट करता. जब वह 9 महीने की गर्भवती थीं तो उसने उन्हें छोड़ दिया. हालात इतने बुरे हो गए कि उन्हें गौशाला में अपनी बच्ची को जन्म देना पड़ा. 

जीवन की प्रतिकूलता झेलती सिंधुताई ने आत्महत्या करने की भी बात सोची लेकिन बाद में अपनी बेटी के साथ रेलवे-प्लेटफॉर्म पर भीख मांगकर गुजर-बसर करने लगीं. भीख मांगने के दौरान वो ऐसे कई बच्चों के संपर्क में आईं जिनका कोई नहीं था. उन बच्चों में अपना दुख नजर आया तो अनाथ बच्चों को गोद लेने का सिलसिला शुरू हुआ.

सिनेमा की कहानी सा जीवन चलता रहा और सिंधुताई अपने साथ साथ उन अनाथ बच्चों का गुजारा भी भीख मांगकर करती. धीरे धीरे परिस्थितियाँ बदली और उन्होंने कई बच्चों को आसरा देना शुरू कर दिया. इस तरह वह 1400 बच्चों की अम्मा बनकर अनाथो की अम्मा के नाम से प्रसिद्ध हुई. 

सिंधुताई की एकमात्र पुत्री ममता है. उन्होंने कहा, बुधवार सुबह उनका अंतिम संस्कार पुणे के हदप्सर स्थित मंजरी में किया जाएगा. 


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