सुशासन की सरकार में एक नेताजी के खासमखास को फायदा पहुंचाने के लिए सिविल सर्जन ने तोड़ दी सारी सीमाएं

सुशासन की सरकार में एक नेताजी के खासमखास को फायदा पहुंचाने के लिए सिविल सर्जन ने तोड़ दी सारी सीमाएं

न्यूज4नेशन डेस्क- पूर्वी चंपारण जिले में नियम के विरूद्ध काम करने और लाभ लेने के चक्कर में पहले के दो सिविल सर्जन पर केस दर्ज हो चुका है फिर भी सिविल सर्जन अपने कारनामों से बाज नहीं आ रहे हैं.एक बार फिर से मोतिहारी के सिविल सर्जन ने नियमों की धज्जी उड़ा दी है। अपने चहेते को फायदा पहुंचाने के लिए उन्होंने सदर अस्पताल के अधीक्षक की रिपोर्ट को भी रद्दी की टोकरी मे डाल दिया। मामला खुलने पर राजद विधायक ने वरीय अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है।

क्या है मामला
सदर अस्पताल की पूर्ण जवाबदेही अधीक्षक की होती है। इसके तहत मोतिहारी सिविल सर्जन ने सदर अस्पताल के अधीक्षक को औषधि केंद्र के लिए 29 अक्टूवर 2018 को जमीन अलॉट करने का पत्र दिया। सिविल सर्जन के पत्र के आलोक में अधीक्षक ने पांच डाक्टरों की कमेटि बना दी। पांच डाक्टरों की कमेटि ने केंद्र खोलने को लेकर स्थल चयन किया था। इसके बाद अधीक्षक ने कमेटि की रिपोर्ट के बाद आवेदिका आभा सिन्हा को सदर अस्पताल कैंपस में जन औषधि केंद्र खोलने के लिए जगह दे दी थी।

लेकिन सिविल सर्जन को वो जगह पसंद नहीं आई। इसके बाद अधीक्षक की रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में डाल कर उसी अस्पताल कैंपस में चुनिंदा जगह अलॉट कर दी गई। मोतिहारी सिविल सर्जन के इस फरमान के बाद से विवाद छिड़ गया है।सिविल सर्जन पर सीधे तौर पर नियम के खिलाफ काम करने का आरोप लग रहा है। साथ ही अपने खास को उपरी दबाव में काम करने का आरोप लग रहा है।

सिविल सर्जन के कारनामों के खिलाफ राजद विधायक ने खोला मोर्चा
मोतिहारी सिविलसर्जन द्वारा अपने चहेते को फायदा पहुंचाने को लेकर लोग अब मुखर होने लगे हैं। सीएस के नियम विरूद्ध कामों के खिलाफ राजद विधायक राजेन्द्र राम ने स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय उप निदेशक से संपर्क किया है। विधायक राजेन्द्र राम ने नियम के विरूद्ध किए गए कामों को रद्द करने की मांग की है।

मोतिहारी में पहले भी इस तरह की हुई है गडबड़ी
मोतिहारी सदर अस्पताल और सिविल सर्जन कार्यालय की तरफ से पहले भी कई तरह के फर्जीवाड़े किए गए हैं। लाभ लेने के चक्कर में हाल के वर्षों में दो सिविल सर्जन पर केस दर्ज हो चुका है। फिर भी सिविल सर्जन की तरफ से गड़बड़ी करने का सिलसिला नहीं रूक रहा।

एक राजनेता के दबाव में काम करने की चर्चा
बताया जाता है कि जिस व्यक्ति को औषधि केंद्र खोलनें की अनुमति दी गई है वह उस जिले का टीवी पत्रकार है। टीवी पत्रकार ने अपनी पत्नी आभा सिन्हा के नाम पर केन्द्र अलॉट करवाया है. बताया जाता है कि उसे एक बड़े राजनेता का संरक्षण प्राप्त है। उसी नेता के दबाव में सिविल सर्जन ने कमेटि की रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में डाल कर मन मुताबिक जगह अलॉट कर दिया है।

सिविल सर्जन नें मामले पर साधी चुप्पी
मोतिहारी सिविल सर्जन डॉ. बी.के. सिंह से जब इस संबंध में पूछा गया तो वे हक्के-बक्के रह गए। कोई जवाब नहीं सुझता देख पहले तो उन्होंने कहा कि फाइल देखकर बताएंगे। इसके बाद वे कभी पटना तो कभी जिले में मीटिंग की बात कर जवाब देने से बचते रहे हैं। अब आप खुद समझ सकते हैं कि दाल में काला नहीं पूरी दाल ही काली है।


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