मुख्यमंत्री के पहल पर मुफीज की हुई वतन वापसी, परिजनों में ख़ुशी की लहर

मुख्यमंत्री के पहल पर मुफीज की हुई वतन वापसी, परिजनों में ख़ुशी की लहर

RANCHI : ख़ुर्शीद के पांव आज एक जगह टिक नहीं रहे थे. वह एयरपोर्ट से बाहर आने वाले लोगों को बड़ी बेसब्री से देख रहा था. लेकिन उसकी आंखें अपने भाई मुफ़ीज़ को ढूंढ रहीं थीं. आखिर वह पल भी आ गया. जब मुफ़ीज़ उसे नजर आया. दौड़ता हुआ ख़ुर्शीद अपने भाई मुफ़ीज़ के गले लग गया. भाई को आंखों के सामने देख खुर्शीद के आंसू छलक गए. बरबस रुंधे गले से बोला....ईदु-उल अजहा मुबारक भाई जान. फिर क्या था. दोनों भाई ऐसे गले मिले मानो वर्षों बाद मिल रहें हों. सच भी तो था. आज पूरे ढाई साल बाद यातनाओं और मुसीबतों को झेल कर खुर्शीद का भाई मुफीज उसके सामने खड़ा था. वह भी बकरीद जैसे मुबारक दिन को. बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर इस नजारे को देख सभी खुश थे.

जहन्नुम जैसी जिंदगी हो गई थी

मुफ़ीज़ ने बताया कि 2017 में वह दुबई गया था. यह सोचकर कि कुछ पैसे कमाकर वह वतन अपने परिवार को भेजेगा. पर ऐसा हुआ नहीं. एक वर्ष तक किसी तरह काम करने के बाद जब उसका अनुबंध समाप्त हुआ तो उसने घर वापसी करना चाहा. लेकिन उससे जबरन काम लिया जाता रहा. अपराधी और गुलामों जैसा व्यवहार उसके साथ उसका मालिक मोहम्मद जहिया हुसैन करने लगा. एक दिन किसी तरह वह जहिया के चुंगल से निकल गया।

लगाया चोरी का आरोप और दर्ज करा दिया मामला

काम छोड़कर भाग जाने के बाद मुफिज के मालिक ने उस पर चोरी का आरोप लगाया. सऊदी अरब की पुलिस ने उसे पकड़ा और फिर छोड़ भी दिया. लेकिन पुलिस लगातार उससे पूछताछ करती रही. मुफीज ने बताया कि किसी तरह किराये के घर पर उसने 4 महीने व्यतीत किये, जो किसी जहन्नुम से कम नहीं था. उसने अपने परिवार वालों को अपनी आपबीती सुनाई और परिवारवालों ने राज्य के मुख्यमंत्री तक मेरी पीड़ा को पहुंचाया. देखते ही देखते मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पहल की और आज मैं अपने घर आ गया. मुझे वतन वापसी की उम्मीद नहीं थी. लेकिन मुख्यमंत्री खुदा बन कर आये. मुख्यमंत्री के आप्त सचिव के पी बालियन ने भी मेरी बहुत मदद की है. बाद में उसपर लगा चोरी का आरोप भी गलत साबित हुआ. मोजन अली मुझे लेकर गया था. उसने गलत ढंग से मेरे कागजात बनवाये थे. वह भी मेरी परेशानी का सबब बना. मैं तो लोगों से अपील करूंगा अपने वतन में काम करो. लेकिन गैर वतन जाकर कभी काम मत करो. 

2017 में गया था विदेश

मुफ़ीज़ के भाई ने बताया कि वर्ष 2017 में मुफ़ीज़ सउदी अरब काम करने गया था. वह एक कुशल मैकेनिक है. उसे लेकर जाने वाला उसके दोस्त ने काम का ऑफर दिया था. लेकिन वहां जाकर उसे पता चला कि वेतन नहीं मिल रहा है और अधिक काम लिया जा रहा है. लेकिन 1 वर्ष का अनुबंध होने की वजह से मुफिज चुप रहा. जब एक वर्ष 2018 में पूरा हुआ तो उसने रांची वापसी आने की गुहार लगाई. बावजूद इसके उससे जबरन काम कराया जाता रहा. इसके बाद हमलोगों ने झारखण्ड़ के मुख्यमंत्री से गुहार लगाई और उन्होंने हमारे भाई की वतन वापसी कराई.

रांची से सुजीत की रिपोर्ट

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