बालिका गृह यौनशोषण मामले में सनसनीखेज खुलासा, पूर्व डीएम पर कस सकता है शिकंजा

बालिका गृह यौनशोषण मामले में सनसनीखेज खुलासा, पूर्व डीएम पर कस सकता है शिकंजा

मुजफ्फरपुर :  मुजफ्फरपुर बालिक गृह यौनशोषण मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जिले में पूर्व में पदस्थापित एक डीएम पर बालिका गृह के संचालन में नियमों की अनदेखी व छूट देने का आरोप लग रहा है। बालिका गृह में लड़कियों से यौनशोषण के मामले में पूछताछ का दायरा बड़े अधिकारियों तक जा सकता है। 

शक के घेरे में पूर्व डीएम

बताया जा रहा है कि जिले के पूर्व डीएम धर्मेंद्र सिंह से भी पूछताछ हो सकती है क्योंकि ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ सेवा संकल्प व विकास समिति को बालिका गृह चलाने की स्वीकृति समाज कल्याण विभाग में निदेशक के पद पर रहते हुए उन्होंने ही दी थी।  इसके अलावा उनसे पहले व बाद के निदेशकों से भी पूछताछ हो सकती है। 

बालिका गृह संचालन में नियमों की अनदेखी

नाम न छापने की शर्त पर पुलिस के एक आलाधिकारी ने बताया कि शुरू से ही बालिका गृह के संचालन में नियमों की अनदेखी की गयी। जिस बिल्डिंग में बालिक गृह का संचालन होता था, उसी बिल्डिंग में प्रेस भी चलाया जाता था और किराये पर लोग भी रहते थे। जबकि नियम के मुताबिक ऐसा नहीं होना चाहिए था। 

बालिका गृह चलाने के लिए स्पष्ट नियम व कानून बने हुए हैं, जिसकी अनदेखी की गयी। अब यह किनके इशारे पर हुआ, यह तो जांच का विषय है। बता दें कि मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के मकान में ही बालिका गृह का संचालन होता था और उस मकान में ही प्रेस का दफ्तर भी था। उसी मकान में रेंट पर भी लोग रहते थे। आखिर यह सब कैसे संभव हुआ ?  

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15 बिंदुओं पर मांगी गयी जानकारी

इधर, एसएसपी हरप्रीत कौर ने बताया कि उन्होंने सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट से 15 बिंदुओं पर जानकारी व कागजात मांगे थे, जो मिल गये हैं। शनिवार को बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक ने एसएसपी हरप्रीत कौर को 15 बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी की रिपोर्ट सौंप दी। 

इसमें जिला बाल संरक्षण इकाई में पूर्व में कार्यरत सहायक निदेशक व बाल संरक्षण पदाधिकारी के बारे में जानकारी उपलब्ध करायी गयी है। वो अब पूरे मामले में मिली जानकारी व कागजात सीबीआई को सौंपने जा रही हैं। 

 
पूरे मामले में दिखी समाज कल्याण विभाग की लापरवाही

बालिका गृह मामले में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टिस्स) की रिपोर्ट आने के बाद  कई स्तर पर विभाग की लापरवाही देखने को मिली। मसलन, जिस मकान में बालिका गृह चल रहा था उसे दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए कई बार कहा गया लेकिन उसे बदला नहीं गया। 

नहीं लगाया गया सीसीटीवी कैमरा

ऐसा कहा जा रहा है कि आरोपी ब्रजेश ठाकुर के दबाव में ही बालिका गृह का स्थान नहीं बदला गया क्योंकि इसके एवज में उसे किराये के मद में लाखों रुपये मिलते थे। इसके अलावा वर्ष 2015 में ही बालिका गृह में सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने को लेकर विभाग को कहा गया लेकिन  सीसीटीवी  कैमरा नहीं लगाया गया। 

शुरू हुई सीबीआई जांच

बता दें कि राज्य सरकार की ओर से बालिका गृह प्रकरण में सीबीआई जांच की अनुशंसा की गई थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर गृह विभाग ने इसकी अनुशंसा केंद्र सरकार को भेज दी थी। इसके बाद सीबीआई ने रविवार को एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी।

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