मुजफ्फरपुर कांड : नींद से जागी नीतीश सरकार, दर्जनभर अधिकारियों पर गिरी गाज

मुजफ्फरपुर कांड : नींद से जागी नीतीश सरकार, दर्जनभर अधिकारियों पर गिरी गाज

PATNA : मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण कांड में देशभर के सामने नाक कटाने के बाद नीतीश सरकार अब नींद से जागती दिख रही है. नींद टूटने के बाद समाज कल्याण विभाग ने पिछले 24 घंटे में अपने 12 अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है. विभाग ने अपनी साख़ बचाने के लिए कुल एक दर्जन अधिकारियों को निलंबित किया है.  

इन अधिकारीयों पर गिरी गाज 

समाज कल्याण विभाग के जिन अधिकारीयों पर निलंबन की गाज गिरी है उनमें जिला बाल संरक्षण इकाई मुजफ्फरपुर सहायक निदेशक दिवेश शर्मा, अररिया के अधीक्षक पर्यवेक्षणगृह मो. फ़िरोज़, विकास कुमार- सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, शिवहर, संगीत ठाकुर- तत्कालीन बाल संरक्षण पदादिकारी मधुबनी, मिराजुद्दीन सदानी-  बाल संरक्षण पदाधिकारी गया, लवलेश कुमार सिंह- बाल संरक्षण पदाधिकारी पटना, रंजन कुमार- तत्कालीन बाल संरक्षण पदाधिकारी भागलपुर , अमरजीत कुमार- तत्कालीन बाल संरक्षण पदाधिकारी मुंगेर, सीमा कुमारी- सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई मुंगेर, घनश्याम रविदास- सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, अररिया, गीतांजलि प्रसाद- सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई भागलपुर, आलोक रंजन- सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई भोजपुर शामिल हैं. 

करवाई का मकसद 

इन अधिकारीयों पर आरोप है की सोशल ऑडिट रिपोर्ट में गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद भी इन्होंने आवश्यक कानूनी कार्रवाई नहीं की। विभाग ने इन अधिकारीयों को इसलिए निलंबित किया है की इन्होनें सोशल ऑडिट रिपोर्ट के बारे में उच्चाधिकारियों को भी अवगत नहीं कराया। हालांकि टाटा इंस्टीच्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की कोशिश टीम ने सोशल ऑडिट प्रतिवेदन मार्च महीने में समाज कल्याण विभाग के आलाधिकारियों को सौंप दी थी. इसके बावजूद यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा. अब विभाग ने दर्जन भर अधिकारीयों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर उन्हीं की जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया है. जाहिर यह पूरी क़वायद इस मामले से जुडी बड़ी मछलियों को बचाने की दिख रही. 

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