शिक्षा परियोजना में सालों से एक ही जगह जमे हैं सैकड़ों कर्मी, कहीं घोटाले के ये कारण तो नहीं...आरटीआई से हुआ खुलासा

शिक्षा परियोजना में सालों से एक ही जगह जमे हैं सैकड़ों कर्मी, कहीं घोटाले के ये कारण तो नहीं...आरटीआई से हुआ खुलासा

MUZAFFARPUR: मुजफ्फरपुर जिले के एक दर्जन से अधिक कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में सामानों की खरीद में घोटाला सामने आया है। इन स्कूलों में एक तरफ तो ड्राई फ्रूट्स एक रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदे गए, वहीं एक अंडे की कीमत 16 रुपए दिखाई गई है। बालिका आवास विद्यालयों में सामान की खरीदारी में जिस तरह की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, उसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा स्कूलों के शिक्षकों की संलिप्तता साफ झलकती है। इसको लेकर अब एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 

बताया जा रहा है कि बिहार शिक्षा परियोजना मुजफ्फरपुर में कार्यरत करीब सैकड़ों कर्मी 5 से 7 वर्ष तक एक ही जगह जमे हुए हैं। इन कर्मियों का लंबे समय से स्थानांतरण नहीं हुआ है। इसका खुलासा तब हुआ जब छात्र राजद के मुजफ्फरपुर अध्यक्ष सह आरटीआई कार्यकर्ता अमरेन्द्र कुमार ने विभाग से इसकी जानकारी मांगी। अमरेन्द्र कुमार ने एक अपने टीम के साथ मुहिम चलाकर समूह में सूचना मांगने का काम किया।

आरटीआई से मिली जानकारी काफी चौंकाने वाली है। बिहार शिक्षा परियोजना मुजफ्फरपुर में ऐसे सैकड़ों कर्मी हैं जिनका ट्रांसफर पिछले 5 से 7 सालों से नहीं हुआ है। जबकी बताया जा रहा है कि रात्रि प्रहरी, मुख्य रसोइया और सहायक रसोइया को छोड़कर सभी का ट्रांसफर किया जा सकता है। लेकिन महत्वपूर्ण पदों पर बैठे कर्मी सालों से एक ही जगह जमे हुए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता अमरेन्द्र कुमार ने आरोप लगाया कि लंबे समय से एक ही जगह जमे कर्मियों के कारण ही कस्तूरबा गांधी विद्यालय में इतना बड़ा घोटाला हुआ है। हालांकि इस संबंध में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की संभाग प्रभारी डॉ कुमारी मेनका का पक्ष सामने नहीं आया है।

देखिए आरटीआई से मिली कर्मियों की पूरी लिस्ट:

 

मुजफ्फरपुर से मनोज की रिपोर्ट

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