न निराशा न थकान, सिर्फ और सिर्फ शिक्षकों के लिए संघर्ष, यह है केदार पाण्डेय की पहचान : शशि भूषण दूबे

न निराशा न थकान, सिर्फ और सिर्फ शिक्षकों के लिए संघर्ष, यह है केदार पाण्डेय की पहचान : शशि भूषण दूबे

Patna : न निराशा न थकान, सिर्फ और सिर्फ शिक्षकों के लिए संघर्ष यह है बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदार पांडेय की पहचान है। यह कहना है बिहार माध्यमिक शिक्षक के शैक्षणिक परिषद के सचिव शशिभूषण दूबे का। 

शशिभूषण दूबे ने कहा है कि बीएसटीए के अध्यक्ष केदारनाथ पाण्डेय के संघर्ष एवं समझ को सलाम करते है। उनका जीवन एक इंकलाबी दर्पण रहा है। जब-जब बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ पर संकट आया केदार पाण्डेय संकट मोचक साबित हुए हैं। 

श्री दूबे ने कहा है कि उनका जीवन शिक्षक संघर्षों का एक खुला दस्तावेज है। 1995 के सारे संकटों का विषपान कर शंकर सा कल्याणकारी सिद्ध हुए। अभी अभी बिहार सरकार ने शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के लिए सरकार ने सेवा शर्त की घोषणा किया है। यह BSTA के नेतृत्व में हुए संघर्ष का प्रतिफल है। कोरोना संकट में हिम्मत से आगे बढ़कर केदारनाथ पाण्डेय ने हड़ताल स्थगन का ऐतिहासिक निर्णय लिया। मुकदमे की वापसी से लेकर वेतन भुगतान तक की प्रकिया को जिस तन्मयता से अध्यक्ष ने संभाला उसका दूजा उदाहरण नहीं है।

उन्होंने कहा है कि सेवा शर्त पर अनेक मिश्रित टिप्पणियां आ रही है। पर सच्चाई यह है कि सेवा शर्त में अनेक समस्याओं का समाधान हुआ है। ईपीएफ का लाभ मिला। शिक्षिका बहनों के साथ दिव्यांग शिक्षकों, पुस्तकालयाध्यक्षों को ऐच्छिक स्थानान्तरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। सबको 120 दिन के अर्जित अवकाश का लाभ मिला। शिक्षिकाओं को मातृत्व अवकाश और शिक्षकों को भी पितृत्व अवकाश का लाभ मिला। तीन वर्षों की सेवा के बाद अध्धयन अवकाश का अवसर प्राप्त हुआ है। सेवा की निरंतरता और एस बी आई से वेतन भुगतान की सुविधा प्राप्त हुआ है।

माध्यमिक से उच्च माध्यमिक में पचास प्रतिशत बहाली,  प्रन्नोति का अवसर, उच्च योग्यताधारी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों को प्रधानाध्यापक बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उत्कर्मित विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन भुगतान की कठिनाई का हल निकला। अनुक्मपा पर बहाली जो वर्षों से लंबित है उसका निदान हो गया।

शशिभूषण दूबे ने कहा है कि हां, पर कुछ सवाल ऐसे हैं जिस पर केदार पाण्डेय के नेतृत्व में संघर्ष कर निदान निकाला जाएगा। मसलन वेतनमान, हमारा लक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ, 15 प्रतिशत की वृद्धि से हम संतुष्ट नहीं है। सेवा की निरंतरता में भी कुछ संशोधन करना होगा। दस, बीस और तीस वर्षों पर वित्तीय प्रनोन्ति को सेवा शर्त में शामिल करना होगा। माध्यमिक शिक्षकों को पंचायती राज व्यवस्था से मुक्ति और   सामान्य शिक्षक और पुस्तकालयाध्यक्षों के ऐच्छिक स्थानान्तरण की लड़ाई लड़नी होगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा और शिक्षकों को निजी हाथों में सौंपने की प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से साजिश हो रही है, इसके खिलाफ भी संघर्ष का बिगुल फूंकना है। इन सारे संघर्षों के एकमात्र नायक केदारनाथ पाण्डेय जी हैं। इनके निर्देश में हम अपने वांछित मंजिल हासिल करेंगे। इसलिए मेरे जीवन की सारी तपस्या इस मनस्वी के चरणों में अर्पित है। आप शकट को दिशा देंगे हम लक्ष्य प्राप्त करेंगें। आपके थकान रहित जीवन को एकबार फिर सलाम।


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