NATIONAL NEWS: मेक इन इंडिया को बड़ा झटका, फोर्ड ने भारत से समेटा कामकाज, 4 साल में 3 कंपनियों ने किया पलायन

NATIONAL NEWS: मेक इन इंडिया को बड़ा झटका, फोर्ड ने भारत से समेटा कामकाज, 4 साल में 3 कंपनियों ने किया पलायन

DESK: अमेरिका की फोर्ड कंपनी ने भारत से अपना कारोबार समेटने का ऐलान किया है. लगभग 3 दशकों तक संघर्ष के बाद कंपनी ने फैसला ले लिया है कि वह भारत में कार बनाना बंद कर देगी. 4 साल में यह तीसरी कंपनी है जिसका भारत से पलायन हो रहा है.

मेक इन इंडिया को बड़ा झटका देते हुए फोर्ड अभ पलायन के मूड में है. इस पलायन का सबसे ज्यादा असर भारतीय कामगारों पर पड़ेगा. इस वजह से 40 हजार लोगों पर सीधा असर पड़ने वाला है. मिली जानकारी के अनुसार कंपनी ने बताया है कि भारत के बाजार में उसकी एक स्थिर जगह बनाने की कोशिशें नाकाम हो गयीं है जिसके बाद यह फैसला कंपनी के द्वारा किया गया है. पिछले साल हार्ले डेविडसन ने भी इस तरह का ही फैसला किया था. फोर्ड कंपनी के भारत में अध्यक्ष और महाप्रबंधक अनुराग मेहरोत्रा ने अपने बयान में कहा कि ‘कंपनी को उम्मीद है कि कंपनी के पुनर्गठन में करीब दो अरब डॉलर का खर्च आएगा. इसमें से 60 करोड़ तो इसी साल खर्च हो जाएंगे, जबकि अगले साल 12 अरब डॉलर का खर्च होगा. बाकी खर्च आने वाले सालों में होगा’. 


भारत में फोर्ड की फैक्ट्री पश्चिमी गुजरात में है, जहां निर्यात के लिए कारें बनाई जाती हैं. मिल रही जानकारी के अनुसार फोर्ड ने भारत बिक्री के लिए कार बनाना फ़ौरन बंद कर दिया है. इसके साथ ही फैक्ट्री का कामकाज इस साल के अंत तक बंद कर दिया जायेगा. फोर्ड का इंजन बनाने वाली और कारों को असेंबल करने वाली फैक्ट्रियां चेन्नई में है, जिन्हें अगले साल की दूसरी तिमाही तक बंद कर दिया जायेगा. फैक्ट्री बंद होने से 4 हज़ार कर्मचारी प्रभावित होंगे. बता दें आईएचएस मार्किट नामक फर्म के असोसिएट डाइरेक्टर गौरव वंगाल ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा की भारत में कार बनाकर अमेरिका निर्यात करने वाली यह एकमात्र कंपनी थी. वह ऐसे वक़्त में जा रहे हैं जब भारत कार निर्माताओं को निर्माण के बदले लाभ देने पर विचार कर रही हैं.

डरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स असोसिएशन ने फोर्ड कंपनी के इस फैसले पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि इस फैसले से डीलरशिप से जुड़े हुए लगभग 40 हजार कर्मचारी प्रभावित होंगे. बता दें कि 2019 में फोर्ड ने अपनी भारतीय हिस्सेदारी के लिए महिंद्र एंड महिंद्रा के साथ समझौता कर लिया था, लेकिन इसी साल की शुरुआत में यह समझौता रद्द हो गया जिसके लिए महामारी के कारण खराब हुईं ओद्यौगिक परिस्थितियों को जिम्मेदार बताया गया.

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