नवादा में आजादी के 72 साल बाद भी नहीं बना रोड,  ग्रामीण करेंगे लोकसभा चुनाव में वोट बहिष्कार

नवादा में आजादी के 72 साल बाद भी नहीं बना रोड,  ग्रामीण करेंगे लोकसभा चुनाव में वोट बहिष्कार

नवादा : जिले के पकरीबरामा के हसना व खरांट के ग्रामीण लोकसभा चुनाव में वोट का बहिष्कार करेंगे। दोनों गांवों के लगभग चार सौ ग्रामीणों ने एकजुट होकर हसना स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में बैठक कर यह निर्णय लिया है. सैकड़ों ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा 'रोड नहीं तो वोट नहीं।

ग्रामीण व नेवी के रिटायर्ड ऑफिसर शशिभूषण कुमार, उप मुखिया संजय कुमार, कपिलदेव सिंह,रामोतार सिंह, मंजीत पासवान, छोटन मांझी, निर्मला कुमारी, कौशल्या देवी, सुमित्रा देवी आदि ने बताया कि जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण ग्रामीणों ने इस लोकसभा चुनाव में वोट बहिष्कार का निर्णय लिया है. ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर यही स्थिति रहा तो लोकसभा के बाद भी सभी चुनावों में ग्रामीण जनता वोट नहीं करेंगे।

सड़क नहीं बनने से नाराज हैं ग्रामीण

हसना व खरांट गांव के लोग सड़क नहीं बनने से नाराज हैं। सड़क नहीं बनने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 72 साल बाद भी ग्रामीणों को एक अदद सड़क नसीब नहीं हुआ है। चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वायदे करते हैं, लोगों को विकास के हवा-हवाई सपने दिखाकर वोट ले जाते हैं, परंतु चुनाव खत्म होते ही सारे वादे रखी रह जाती है. 

विधायक से लेकर सांसद तक ने ग्रामीणों को ठगा

विधायक हो या सांसद सबने ग्रामीणों को ठगा है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण की मांग स्थानीय विधायक से लेकर सांसद तक किया गया,परंतु किसी भी जनप्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को भी फैक्स किया गया। इतना सब करने के बाद भी ग्रामीण सड़क के लिए तरस रहे हैं। गौरतलब है कि पकरीबरावां-रूपौ पथ से हसना व खरांट की दूरी महज 3 किमी. है। दोनों गांवों के बीच से सड़क बननी है। ग्रामिणों ने बताया कि वर्ष 2009 में सड़क निर्माण के लिए मिट्टी भरा गया था, परंतु बीते 10 वर्षों में स्थिति जस की तस है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि रोह के सिंघना तक पक्की सड़क बनीं हुई है। वहां से हसना की दूरी महज एक से डेढ़ किमी. है जबकि खरांट की दूरी दो-ढाई किमी. है। सिंघना से भी सड़क मिला दी जाए तो ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान काफी हद तक हो जाएगा।

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