नवादा के जुम्मन मिस्त्री ने किया कमाल, बना दिया एयर कंडीशंड पीपीई किट

नवादा के जुम्मन मिस्त्री ने किया कमाल, बना दिया एयर कंडीशंड पीपीई किट

NAWADA : पीपीई किट पहनकर स्वास्थ्यकर्मियों के लिए काम करना काफी मुश्किल भरा काम होता है. खासकर गर्मी के दिनों में काफी परेशानी होती है. ऐसे में नवादा में एक एयर कंडीशन मॉडिफाइड पी.पी.ई किट बनाया गया है,जिसका मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों एवं फ्रंटलाइन वर्कर की किसी भी वायरस  एवं इन्फेक्शन से बचाव और सुरक्षा है. इस पी.पी.ई किट को तीन भाग में बनाया गया है. जिसमे नीचे का एवं बीच का भाग को प्लास्टिक से बनाया गया है. सबसे ऊपर का भाग थर्मोकोल एवं सूती वस्त्र से बनाया गया है. इसमें सबसे आगे ट्रांसपेरेंट सीट लगाया गया है,जिससे की आगे की वस्तु को साफ - साफ देखा जा सके और बाहरी दूषित हवा अंदर प्रवेश ना कर सके. थर्मोकोल के ऊपर भाग में एक बड़ा होल किया गया है,जिसमे विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को लगाया गया हैं. जैसे - एयर ब्लोअर फैन ,टेंप्रेचर सेंसर जो कि अंदर के तापमान के अनुसार बदलता है. ऑटोमैटिक सेंसर स्विच जो हेड कवर को पहनते है ए.सी को चालू कर देता है. साथ ही साथ अंदर एक सैनिटाइजर पाइप एवं नोजल लगाया गया है,ताकि जरूरत पड़ने पर पी.पी.ई किट के अंदर भाग को सैनेटाइज किया जा सके. सभी यंत्र को ग्लू (सुलेशन) एंव स्क्रू की सहायता से असेंबल किया गया है. इस सभी यंत्रों को चलाने के लिए एक रिचार्जेबल बैटरी को लगाया गया है जो किसी भी मोबाइल चार्जर से चार्ज हो जाता है. एक बार चार्ज हो जाने पर 12 घंटे तक लगातार काम करता है. ठंडे हवा को अंदर प्रवेश करने से पहले फिल्टर मास्क लगाया गया है. जो वायरस एवं बैक्टीरिया को अंदर आने से रोकने में मदद करता है. वेलक्रो टेप जिसके सहयोग से तीनों पार्ट को अलग अलग पहन कर एक साथ जोड़कर सील किया जाता है, ताकि बाहरी प्रदूषित हवा अंदर ना आ सके. पी.पी.ई किट के अंदर वर्कर के द्वारा छोड़ा गया कार्बन डाईऑक्सइड एवं दूषित हवा को बाहर निकालने के लिए चार रीलिज सेफ़्टी भाल्व लगाया गया है. सूचक के रूप में बाहर एक LED लाइट लगाया गया है. जो ये इंडीकेट करता है कि अंदर सभी यंत्र सुचारु ढंग से कार्य कर रहे है. 

इस पीपीई किट को पहनने के बाद आराम एवं ठंडक महसूस होती है. जिसे पहनकर डॉक्टर एवं फ्रंटलाइन वर्कर कुशलता पूर्वक अपने कार्य कर सकेंगे. क्योंकि यह पी.पी.ई किट सुरक्षा की दृष्टिकोण से फूल बॉडी कवर के रूप में तैयार किया गया है. इसमें संक्रमण से बचाव के लिए अंदर सनिटाइजेशन की भी व्यवस्था है जिसे जरुरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है. 

इस पी.पी.ई किट को तैयार करने वाले अवधेश कुमार उर्फ जुम्मन मिस्त्री,मोहल्ला - राम नगर नवादा को प्रेरणा एक अखबार में छपे सूरत शहर के एक अज्ञात लैब टेक्नीशियन से मिली, जिनका नाम चेतन चौहान है. जब जुम्मन मिस्त्री ने अखबार में लैब टेक्नीशियन की दर्द भारी कहानी पढ़ा. जिसमे वो लोगो से बोल रहे थे कि कोरोना से मत डरिए,कोरोना का जाच करवाए, मुझे कैंसर है फिर भी सबके सैंपल ले रहा हूं. चेतन लगभग 5 साल से रीढ़ के कैंसर से जूझ रहे है. लेकिन फिर भी अपने इलाज को दर किनार कर लगातार डयूटी कर रहे है. चेतन कहते हैं की मुझे गर्व है की संकट के दौरान काम करने पर काम से डर नहीं लगता है. लेकिन पी.पी.ई सूट पहनने के बाद एक मरीज के रूप में सांस लेने में दिक्कत होती है. क्यूंकि सूट की डिजाइन ही  ऐसी है कि कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक इसमें नहीं रह सकता है. वे कहते है कि समान लोगो के मुकाबले कैंसर रोगी की रोग प्रतिरोधी क्षमता कम होती है. इसीलिए कैंसर विषेशज्ञ वायरल इन्फेक्शन से बचाव की बात कहते है. इस कहानी को पढ़ने के बाद जुम्मन मिस्त्री ने पटना के वरीय डॉक्टर दिवाकर तेजस्वी एवं नवादा के स्थानीय चिकिस्तक उमेश प्रसाद तथा अनिल सिंह से इस संबंध मे बात किया तो बताया गया कि पी.पी.ई किट पहनने के बाद शरीर में बहुत गर्मी लगती है एवं पसीना निकलता है. इस वजह से बेचैनी लगने लगता है. बहुत से लोगों को इन्फेक्शन हो जाता है और इसकी वजह से गंभीर बीमारी का लोग शिकार हो जाते है. इसी सब घटना सुनने एवं पढ़ने के बाद जुम्मन मिस्री ने सोचा कि क्यों नहीं पी.पी.ई किट को मॉडिफाई कर के नया स्वरूप दिया जाय. जिसे पहनकर स्वास्थ्यकर्मी एवं फ्रंटलाइन वर्कर को सुरक्षा एवं आराम महसूस हो. 

नवादा से अमन सिन्हा की रिपोर्ट

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