इन दस नारों के दम पर दुश्मनों को बेदम करने का प्लान बना चुका है NDA

इन दस नारों के दम पर दुश्मनों को बेदम करने का प्लान बना चुका है NDA

न्यूज4नेशन डेस्क- जी हां राजनीतिक इतिहास इसका गवाह है कि नारों के दम पर सत्ता हासिल करने की लड़ाई लड़ी जाती रही है और जीत का स्वाद भी चखा जाता रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के  इस नारे ने तो कमाल ही कर दिया ।नारा था सबका साथ सबका विकास।वाकई सबका साथ मिला और 30 साल बाद कोई अकेली पार्टी अपने दम पर सत्ता में आ गयी।

2015  बिहार विधानसभा चुनाव में ,,बिहार में बहार है नीतीशे कुमार है नाम के इस नारे ने भी अपना काम कर दिखाया अब बारी है 2019 के लोकसभा चुनाव की ।इस बार भी जहां एक तरफ बीजेपी ने मोदी है तो मुमकिन है का नारा दिया है तो वही सहयोगी जदयू ने तो नारों का भरमार कर दिया है.

जदयू ने इस बार नया नारा गढ़ा है .

बिहार की जनता की आस,

नीतीश- मोदी -रामविलास।

इस नारे में जदयू ने उदारता दिखाते हुए पीएम मोदी और लोजपा प्रमुख को भी जगह दी है।

इसी तरह जदयू ने कुछ दिन पहले  सच्चा है अच्छा है! चलो नीतीश के साथ चलें, वाले नारे के साथ लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान की शुरुआत की थी। नारों को गढ़ने में इस बात का ख्याल रखा गया है कि एक तरफ सरकार की उपलब्धियों से  मतदाता को रूबरू कराया जाय तो दूसरी तरफ विपक्षी को निशाने पर लेते हुए जबरदस्त चोट भी किया जाय। अब जरा इस नारे को सुनिए

मेवा नहीं सेवा की सरकार

हमारा परिवार पूरा बिहार।

इस नारे में जहां एकतरफ सरकार के कामकाज के तरीके को बताया गया है वहीं दूसरी तरफ प्रमुख विपक्षी पार्टी राजद को निशाने पर लिया गया है।

 वहीं छात्रों के लिये चलाई जा रही सरकार की साइकिल योजना व बिजली को लेकर भी एक नारा गढ़ा गया है।

अब न बिहार आहार चाहिए

साइकिल पर बिटिया सवार चाहिये

सरकार के द्वारा महिला सशक्तिकरण को लेकर चलाये जा रहे कार्यक्रमो को ध्यान में रखते हुए चुनावी नारों को अमली जामा पहनाया गया है

नई उड़ान नया आसमान

आधी आबादी को पूरा सम्मान

सुशासन को भी नारे का सहारा दिया गया है

निक बिहार ठीक बिहार

सुशासन का प्रतीक बिहार

इसी तरह नीतीश कुमार की राजनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए एक नारा बनाया गया है

नेता वो जो निर्णय ले
नीतीश कुमार एनडीए सरकार

वही एनडीए गठजोड़ का भी ध्यान रखा गया है,जरा इस नारे पर गौर कीजिये

नेता और नियत बेजोड़ चाहिये

बिहार में एनडीए गठजोड़ चाहिये

नारे गढ़ लिए गए हैं अब जोर शोर से लगाये भी जा रहे हैं. अब देखने वाली बात यह होगी कि ये नारे मतदाताओं को कितना आकर्षित कर पाती हैं।

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