नीतीश ने दिया बीजेपी को पहला बड़ा झटका, बता दिया यह काम नहीं हो सकता,दिल्ली से लेकर बिहार तक के बीजेपी नेता देखते रह गए

नीतीश ने दिया बीजेपी को पहला बड़ा झटका, बता दिया यह काम नहीं

पटना: एनडीए के समर्थन से नीतीश नौवीं बार बिहार के सीएम बने हैं. बिहार में नई सरकार ने काम करना शुरु कर दिया है. ऐसे में राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनो दलों में दूरी देखने को मिली है.  बिहार में राज्य सभा चुनाव को लेकर एनडीए और इंडी गठबंधन ने खाली हुई छह सीटों के लिए तीन तीन उम्मीदवार उतार दिए हैं. माना जा रहा था कि छह उम्मीदवार संख्या बल के लिहाज से आसानी से जीत हासिल कर लेंगे, लेकिन इसी बीच इस बात की चर्चा तब तेज हो गई भाजपा सातवां उम्मीदवार भी उतार सकता है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो जाएगा. लेकिन नीतीश कुमार की ना के बाद भाजपा न अपने कदम पीछे खींच ली. 

कथित तौर पर बिहार भाजपा के कोषाध्यक्ष राकेश तिवारी के लिए भी  राज्यसभा के सातवे उम्मीदवार के तौर पर नामांकन के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में दस हजार रुपए जमा कराए गए . इसके बाद ये कयास तेज हो गए हैं कि क्या एनडीए की ओर से सातवें उम्मीदवार की तैयारी की जा रही थी. राकेश तिवारी बिहार प्रदेश भाजपा के कोषाध्यक्ष के साथ-साथ बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन भी हैं.

राकेश तिवारी अगर अपनी उम्मीदवारी कर देते तो राज्यसभा चुनाव रोचक हो जाती.  संख्या बल है उसके अनुसार एनडीए के तीन उम्मीदवारों की जीत पक्की है. वहीं इंडी गठबंधन में राजद के संख्या बल के हिसाब से भी जीत तय मानी जा रही है. लेकिन, माना जा रहा है कि सातवां उम्मीदवार आने की स्थिति में कांग्रेस उम्मीदवार डॉ अखिलेश सिंह की सीट फंस सकती थी.

सूत्रों के अनुसीर भाजपा राज्यसभा चुनाव में सातवें उम्मीदवार के पक्ष में थी. कथित तौर पर बिहार क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष राकेश तिवारी बतौर सातवें उम्मीदवार अपना किस्मत आजमाना चाह रहे थे. वोटों का गणित ये था कि राज्यसभा के एक उम्मीदवार के लिए 35 विधायकों का मत जरूरी है. संजय झा को भेजने के बाद जदयू के 10 विधायक शेष रह जाते. भाजपा के पास भीम सिंह और धर्मशिला गुप्ता को राज्यसभा भेजने के बाद 8 विधायक शेष रह जाते. हम के चार विधायक और एक निर्दलीय विधायक को जोड़ कर 23 विधायक हो जाते. शेष 12 विधायक का इंतजाम करना होता. 

 कथित तौर पर सीएम नीतीश कुमार को भाजपा का यह कदम रास  नहीं आया और  भाजपा के इस प्रस्ताव को नीतीश कुमार ने खारिज कर दिया. नीतीश का कहना था कि इससे सरकार की छवि धूमिल होगी, हॉर्स ट्रेडिंग बढ़ जाएगा. वैसे भी  बगैर नीतीश कुमार की सहमति के यह खेल संभव नहीं  था.

बता दें कि राज्यसभा के लिए बिहार में छह सीटों पर चुनाव है. तकनीकी तौर पर देखें तो एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 35 विधायकों के वोट की जरूरत है. एनडीए के संजय झा, डॉ.भीम सिंह और डॉ. धर्मशीला गुप्ता को जीतने के लिए 105 वोटों चाहिए. एनडीए के 130 विधायक हैं. साफ है कि एनडीए के 3 उम्मीदवारों को वोट देने के बाद एनडीए के 25 विधायकों का वोट बचा रहेगा.