नीतीश का गुस्सा : 31 साल के तेजस्वी को उसी की भाषा में नीतीश का करारा जवाब, मेरे भाई समान दोस्त का बेटा है इसलिए इसको कुछ नहीं कहते हैें

नीतीश का गुस्सा : 31 साल के तेजस्वी को उसी की भाषा में नीतीश का करारा जवाब, मेरे भाई समान दोस्त का बेटा है इसलिए इसको कुछ नहीं कहते हैें

पटना... बिहार विधानमंडल का सत्र शुक्रवार को समाप्त हो गया, लेकिन आखिरी दिन का सत्र बेहद हंगामेदार रहा। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक ऐसा पुराना मामला उठा दिया, इसके बाद नीतीश कुमार तमतमा गए। यकीनन नीतीश कुमार को विधानसभा सत्र के दौरान इस तरह से किसी ने गुस्से में नहीं देखा हेागा। तेजस्वी यादव ने जब सदन में ये कहा कि मसला गंभीर है और इनके खिलाफ हत्या का मुकदमा है तो तेजस्वी के इसी बयान पर नीतीश कुमार ने आपा खो दिया और सदन के अध्यक्ष से कहा कि अगर ऐसी बात है तो आप जांच करवाईए, ये झूठ बोल रहा है। इसके खिलाफ कार्रवाई हो। 69 साल के नीतीश कुमार का ऐसा गुस्सा शायद ही किसी ने देखा होगा, लेकिन तेजस्वी ने ऐसी बात ही कह दी थी कि नीतीश आगबबूला हो उठे थे। सदन के पटल से ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और लालू यादव को अपनी ताकत का एहसास दिला दिया। बिहार विधानमंडल का आखिरी दिन बेहद हंगामेदार रहा, लेकिन सदन के पटल से बातें निकली हैं तो वो दूर तलक जरूर जाएगी। 


फिर क्या था, नीतीश कुमार ने उसी लहजे में 31 साल के नौजवान को जवाब भी दे दिया।  नीतीश कुमार ने सदन में कहा कि मेरे भाई समान दोस्त का बेटा है, इसलिए सुनते रहते हैं। हम कुछ नहीं बाेलते हैं। इसके पिता को लोकदल का नेता किसने बनवाया, इसको कुछ पता है। इसको डिप्टी चिफ मिनिस्टर किसने बनवाया था और जब इस पर आरोप लगा कि तो हमने बोला तुम एक्सप्लेन करो, लेकिन इसने नहीं किया तो हम क्या करते और हमने भाजपा के साथ फिर से सरकार बना ली। 

नीतीश कुमार ने सदन को बताया कि क्यों तीन साल पहले यानी 2017 में आरजेडी का साथ छोड़ दिया था। नीतीश कुमारा ने तेजस्वी से सवाल भी पूछे कि 2017 में लगे आरोपों की सफाई आकर क्यों नहीं दी। नीतीश कुमार जब बोल रहे थे तो सदन का पूरा माहौल बदल चुका था। सत्ता पक्ष के तमाम विधायक अपने सीट से खड़े हो गए थे और तेजस्वी के बयान की निंदा कर रहे थे, जिसमें तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के एक पुराने मामले को कोर्ट का हवाला देकर कोड किया। 

आज तेजस्वी यादव सदन में नीतीश कुमार के जिस जुर्माने की बात कर रहे थे, दरअसल पूरा मामला 2017 का है। क्या था पूरा मामला आप भी जानिए। 

1.  2009 में नीतीश कुमार के नाम एक किताब छपी थी। 

2. आद्री संस्था ने 2009 में किताब का प्रकाशन किया था।

3. किताब का नाम स्पेशल कैटेगरी स्टेटस था। 

4. किताब की प्रस्तावना में नीतीश का अनुमोदन था। 

5. प्रकाशन के बाद जेएनयू के पूर्व छात्र अतुल सिंह ने ऐतराज जताया था। 

6.  साल 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। 

7.  अतुल ने नीतीश कुमार को भी प्रतिवादी बनाया था। 

8. नीतीश कुमार पर कॉपीराइट का मामला दर्ज हुआ था। 

9. हालाकि नीतीश कुमार ने कोर्ट से नाम हटाने का अनुरोध किया था। 

10. 2017 में दिल्ली हाईकोर्ट ने नीतीश कुमार पर 20 हजार का जुर्माना लगाया था। 


इधर, पटना के सर्द मौसम जब सदन में चर्चा के दौरान माहौल पूरी तरह से गर्म रहा। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए तो तेजस्वी यादव को भी नीतीश का करारा जवाब मिला। तेजस्वी यादव ने निजी हमला करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के एक बेटे हैं और हैं कि नहीं ये तो वही बताएंगे, लेकिन हम एक बात इतना जरूर कह सकते हैं हमने चुनाव में किसी पर हमला नहीं किया। मुख्यमंत्री चुनाव में बच्चे गिनते रहे, लेकिन हम इतना कहेंगे कि मुख्यमंत्री जी ने बेटी के डर से दूसरा बच्चा पैदा नहीं किया। वहीं नीतीश कुमार ने कहा कि हम आग्रह करेंगे विनम्रता पूर्वक कि भाई जो कुछ भी हो। कोई सत्तापक्ष में है तो कोई विपक्ष में है, सबकी अपनी इच्छाएं हैं मुझे उस पर कुछ नहीं कहना है। हम यहां आग्रह करेंगे कि अगर आगे करना है तो कुछ मार्यादा का ख्याल रखना होगा। अमार्यादित ढंग से कोई भी काम करने की जरूरत नहीं है। 



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