बिहार में अफसरशाही-भ्रष्टाचार से लोग त्रस्त, CM नीतीश के 'मंत्री' ने ही खोली पोल,कहा- पैसे के लिए पसीना छुड़ाते हैं अफसर

बिहार में अफसरशाही-भ्रष्टाचार से लोग त्रस्त, CM नीतीश के 'मंत्री' ने ही खोली पोल,कहा- पैसे के लिए पसीना छुड़ाते हैं अफसर

PATNA : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री राम सूरत कुमार पूरे तौर पर एक्शन में हैं। वे विभाग में सिस्टम दुरुस्त करने को लगातार प्रयासरत्त हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में भ्रस्टाचार पर वे लगातार चोट कर रहे। वे बार-बार यह कह रहे कि अफसर पैसे लेने के लिए किसानों को परेशान करते हैं और जान बूझकर मामले को लटकाते हैं। लिहाजा इस सिस्टम को बदलना है और जो इसमें बाधक बनेंगे उनपर कार्रवाई होगी। राजस्व मंत्री रामसूरत राय आज शास्त्रीनगर स्थित राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान में जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों के राज्य स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में विभाग के अपर मुख्य सचिव, विवेक कुमार सिंह, निदेशक, भू-अर्जन समेत सभी 38 जिलों के भू-अर्जन पदाधिकारी/सक्षम प्राधिकार उपस्थित थे। 

किसानों को परेशान किया तो खैर नहीं

मंत्री ने राज्य में चल रही छोटी परियोजनाओं में अर्जित हुई भूमि के मुआवजा भुगतान में अधिकारियों द्वारा की जा रही टाल-मटोल की प्रवृति पर चिंता जताई। उनका कहना था कि राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे समेत बड़ी परियोजनाएँ जिनकी मानिटरिंग राज्य स्तर से होती है, उसके रैयतों को तो मुआवजा मिल जाता है। किन्तु ग्राम, अंचल या जिला स्तर की जरूरतों के लिए जमीन का अधिग्रहण होता है तो वहाँ के लोगों को भू-अर्जन कार्यालय से पैसा लेने में पसीना छूट जाता है। मंत्री ने सभी भू-अर्जन पदाधिकारियों को जनवरी तक सभी लंबित भुगतान को प्राथमिकता पर समाप्त करने का आदेश दिया। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। 

जनवरी से प्रमंडलवार करेंगे समीक्षा

मंत्री ने यह भी कहा कि जनवरी, 2021 के पहले हफ्ते से वे अपर मुख्य सचिव के साथ प्रमण्डलवार राजस्व की समीक्षा बैठक करेंगे। प्रमण्डवार बैठक की शुरूआत पूर्णियाँ से होगी, इसमें जिलावार सभी विषयों की समीक्षा की जाएगी। मंत्री ने मुआवजा भुगतान में 20 प्रतिशत मुआवजा देने में हो रही परेशानियों की तरफ अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट किया। उनका कहना था कि बांध, सड़क या रेल के लिए जब जमीन का अधिग्रहण होता है तो पहले चरण में रैयत को 80 प्रतिशत मुआवजा दिया जाता है। किन्तु, 20 प्रतिशत मुआवजा देने में अनावश्यक देरी की जाती है। ऐसे सबूत मांगे जाते है, जिनका अस्तित्व ही नहीं होता। नदी की धार में समा गए मकानों का सबूत मांगना सिर्फ-और-सिर्फ उगाही के लिए किया जाता है। मंत्री का कहना था कि जब अधियाची विभाग ने पैसा दे दिया है, भू-अर्जन कार्यालय के पास पैसा है और भू-धारी को मुआवजा नहीं मिल रहा है, तो वह दुर्भाग्यपूर्ण है। मंत्री ने कैम्प लगाकर जमीन का मुआवजा देने का सुझाव दिया। ऐसे कैम्पों में स्थानीय निर्वाचित जन प्रतिनिधि जरूर रहे। अगर मुआवजा भुगतान का कैम्प किसी गांव में लग रहा है तो वहां के मुखिया, प्रमुख, जिला पार्षद, विधायक के समक्ष भुगतान कराएं। इससे पारदर्शिता तो आयेगी ही, गलत व्यक्ति को भुगतान नहीं होगा। साथ ही इससे विभाग की छवि भी लोगों के बीच ठीक होगी। मंत्री राम सूरत कुमार ने सभी जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों को परियोजना स्थलों का आकस्मिक दौरा करने का सुझाव दिया। इससे उन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी होगी और कार्यालय कर्मियों के व्यवहार की सटीक जानकारी मिल पाएगी। 

मंत्री राम सूरत कुमार ने कई अटकी हुई परियोजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी ली. विशेषकर बागमती परियोजना, मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी रेल लाईन परियोजना, राष्ट्रीय राजमार्ग-77 समेत राज्य की महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं के लंबित होने का कारण पूछा। हाजीपुर-मुजफ्फरपुर फोर लेन में सराय के पास सड़क नहीं बनना या फिर मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी फौर लेन में सैदपुर के पास सड़क निर्माण अधूरा रहना। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि ज्यादातर मामले रैयतों द्वारा मुआवजा राशि स्वीकार नहीं करने की वजह से लंबित है। कई मामले न्यायालय में विचाराधीन है। अपर मुख्य सचिव द्वारा बताया गया कि लोगों से सीधी बातचीत करके कई समस्याओं का हल निकाला गया है। जब लोगों को लग जाता है कि सरकार की भी सीमा है, और इससे अधिक मुआवजा नहीं मिल सकता है तो अक्सर वो मान जाते है। अपर मुख्य सचिव ने सभी जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों को अधियाची विभागों के पास लंबित राशि तुरंत मांगने का आदेश दिया ताकि लंबित मुआवजा का भुगतान शीघ्र किया जा सके।

पटना से विवेकानंद की रिपोर्ट

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