डंसने में निपुण नीतीश कुमार की पार्टी ! नये सहयोगी बने RJD पर 2020 में की थी सर्जिकल स्ट्राइक, 2018 में कांग्रेस के 4 MLC को पाले में मिलाया था

डंसने में निपुण नीतीश कुमार की पार्टी ! नये सहयोगी बने RJD पर 2020 में की थी सर्जिकल स्ट्राइक, 2018 में कांग्रेस के 4 MLC को  पाले में मिलाया था

PATNA: नीतीश कुमार ने बीजेपी से संबंध खत्म कर लिया है। तेजस्वी यादव से हाथ मिलाकर नीतीश कुमार आठवीं दफे मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। एनडीए से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। मुख्यमंत्री के बाद जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भारतीय जनता पार्टी को निशाने पर लिया है। ललन सिंह नने कहा कि भाजपा ने सहयोगी दल रहते हुए हमारी पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा है कि अरुणाचल में जदयू के 7 में से 6 विधायकों को बीजेपी ने तोड़ लिया। वैसे नीतीश कुमार की पार्टी भी तोड़फोड़ में ही भरोसा करती है। ललन सिंह भले ही भाजपा पर जेडीयू विधायकों के तोड़ने का आरोप लगा रहे लेकिन बिहार में भी जेडीयू ने तोड़फोड़ की ही राजनीति की है। 

बसपा और लोजपा को कर चुके हैं खत्म

2020 विधानसभा चुुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के टिकट पर एक भी मुस्लिम विधायक चुन कर नहीं आये। लिहाजा जेडीयू की नजर बसपा के एकमात्र विधायक जमां खान पर टिक गई। जमा खान को मंत्री का प्रलोभन दे पार्टी में मिला लिया गया। जेडीयू में शामिल होते हीं उन्हें मंत्री बना दिया गया। इसके बाद 2021 में नीतीश कुमार ने लोजपा के एकमात्र विधायक राजकुमार सिंह को अपने दल में शामिल करा लिया। इसके बाद जेडीयू ने लोजपा के सांसदों में सेंधमारी की कोशिश की। नीतीश कुमार की पार्टी इस कोशिश में थी कि चिराग पासवान को छोड़ बाकी के 5 सांसदों को अपने पाले में ले आया जाये। पशुपति पारस के नेतृत्व में पांच सांसदों ने बगवात किया। लेकिन उन सांसदों को नीतीश कुमार अपने दल में शामिल कराने में विफल साबित हुए। कहा जाता है कि बीजेपी ने नीतीश कुमार के मिशन में अडंगा लगा दिया और लोजपा के पांच सांसदों को अलग गुट की मान्यता दिया दी।

2020 में ललन सिंह के नेतृत्व में राजद पर सर्जिकल स्ट्राइक  

नीतीश कुमार अब महागठबंधन के हिस्सा हो गये हैं। जेडीयू ने राजद और कांग्रेस दोनों को डंसने का काम किया है। नीतीश कुमार की पार्टी ने जून 2020 में राजद पर सर्जिकल स्ट्राइक किया था। वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह की अगुआई में राजद के खिलाफ जेडीयू का सफल सर्जिकल स्ट्राइक हुआ और पांच विधान पार्षदों को रातोरात अपने पाले में मिला लिया। उस दिन राष्ट्रीय जनता दल में बड़ी टूट हुई थी। 5 विधान पार्षदों ने राजद का साथ छोड़ जेडीयू का दामन थाम लिया था। इनके नाम हैं राधा चरण सेठ, संजय प्रसाद, रणविजय सिंह, दिलीप राय और कमरे आलम.

मार्च 2018 में कांग्रेस के चार एमएलसी को तोड़ा था

इसके पहले नीतीश कुमार ने कांग्रेस में सेंधमारी की थी.1 मार्च 2018 को  बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी सहित कांग्रेस के चार विधान पार्षदों ने सीएम और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश के समक्ष जेडीयू की सदयस्ता ग्रहण की थी. इस दौरान अशोक चौधरी ने कहा कि हम सभी मिल कर नीतीश कुमार के हाथों को मजबूत करेंगे. अशोक चौधरी के साथ एमएलसी दिलीप चौधरी, तनवीर अख्तर और रामचंद्र भारती ने भी जदयू का दामन थाम लिया था। तब नीतीश कुमार ने वर्तमान की सहयोगी कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया था। 

ललन सिंह का भाजपा पर हमला 

ललन सिंह ने बुधवार को भाजपा पर गठबंधन धर्म नहीं निभाने का आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि अब भाजपा अटल-आडवाणी वाली पार्टी नहीं रही जो 1996 से सभी दलों को साथ लेकर चलती थी. मौजूदा भाजपा ऐसी है जो अरुणाचल में जदयू के विधायकों को तोड़ लेती है. वहां 7 में से 6 जदयू के विधायक तोड़े गए. क्या यही गठबंधन धर्म था.  उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनना था. उन्होंने कोई साजिश नही की और सब कुछ ठीक रहा. वहीं 2020 के विधानसभा चुनाव के समय जिस व्यक्ति आरसीपी को नीतीश कुमार ने जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया उस व्यक्ति को ही भाजपा ने साजिश के तहत अपने साथ जोड़ लिया. जिन लोगों ने लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जदयू को नुकसान पहुँचाया वही सब भाजपा में शामिल हो गए. 

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