नियम को अनदेखी कर नदी मे डगमगाती ओवरलोड नैया और काल के गाल में समाते लोग... जानिए क्या है नाव चलाने का नियम...

नियम को अनदेखी कर नदी मे डगमगाती ओवरलोड नैया और काल के गाल में समाते लोग... जानिए क्या है नाव चलाने का नियम...

पटना : बिहार के भागलपुर जिले में आज नाव हादसा हुआ जिसमें अभी भी कई लोग लापता हैं। जब कभी भी कोई अप्रिय घटना घटती है तो घटनास्थल पर अधिकारी पहुंचकर लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की बात करती है लेकिन कार्रवाई क्या होती है इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि हर बार नदी में ओवरलोड नाव हादसे की शिकार हो जाती है और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। आज भागलपुर में भी कुछ इसी तरह का हुआ । एक नाव पर सैकड़ों लोग सवार थे और बीच नदी में नाव डूब गया जिससे अफरा तफरी का माहौल कायम हो गया हालांकि कुछ लोग तैरकर बाहर निकले तो कुछ अभी भी लापता हैं वही एक की मौत की पुष्टि की जा रही है। इससे पहले वर्ष 2017 में भी राजधानी पटना में नाव हादसा हुआ था जिसने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया था और 24 लोगों की मौत हो गई थी मौत के बाद प्रशासन के साथ-साथ सरकार के द्वारा कई तरह के दावे और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही गई ।लेकिन जैसे जैसे दिन बीते गया तमाम दावे हवा हवाई हो गए । अगर उस वक्त सही से कार्रवाई हुई रखी तो आज यह हादसा नहीं हुआ रहा था आइए जानते हैं अब तक कितनी बार हो चुकी है नाव हादसा उसमें कितने लोगों ने अपनी जान गवाई है...

*31 जुलाई 2020 को गोपालगंज में नाव हादसा हुआ जिसमें 6 बच्चों सहित 9 लोगों की मौत हो गई।

 *25 अगस्त 2020 को सुल्तानगंज के अगुवानी घाट में हुए नाव हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

* नाव में 50 से अधिक लोग सवार थे। 5 अगस्त 2020 को सहरसा और खगड़िया में नाव हादसा हुआ। इस घटना के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

*4 अगस्त 2020 को खगड़िया में बड़ी नाव दुर्घटना हुई, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, इस घटना में 8 लोगों की मौत हुई। इसमें 5 महिलाएं और 2 बच्चे शामिल रहे। 

 आज नवगछिया में हुए नाव हादसे में भी ऐसी ही मनमानी की गई है। नाव में 50 लोगों के सवार होने की बात सामने आ रही है। सवाल है कि एक नाव में 100 लोग कैसे सवार हुए, नाव में इस तरह की मनमानी हो रही थी तो प्रशासन को इसकी सूचना क्यों नहीं थी। घटना का कारण जांच के बाद ही सामने आएगा लेकिन इस बड़े हादसे के लिए स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार बताया जा रहा है।

जानिए क्या है नाव चलाने का नियम...

नाव के संचालन को लेकर भी कड़ा नियम है। नाव का रजिस्ट्रेशन डीटीओ कार्यालय से कराए जाने का नियम है लेकिन बिहार में जिलाधिकारी की निगरानी में नावों का संचालन होता है। पटना में नाव के रजिस्ट्रेशन का जिम्मा एसडीओ को दिया गया है। लेकिन पटना में नाव हादसे के बाद यह बात सामने आई थी जिला प्रशासन की कोई मॉनिटरिंग नहीं हो रही है। बिहार के अन्य जिलों में भी ऐसे ही मनमानी हो रही है। प्रशासन की अनदेखी के कारण न तो नाव का रजिस्ट्रेशन हो रहा है और ना ही डीएम के स्तर से निगरानी की जा रही है। ऐसे में पुरानी हो चुकी नाव में लोगों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।

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