न्यूज4नेशन के खबर पर लगी मुहर..नियोजित शिक्षकों के हाथ नहीं लगा कुछ खास,कोर्ट अवमानना से बचने के लिए EPF देने की घोषणा

न्यूज4नेशन के खबर पर लगी मुहर..नियोजित शिक्षकों के हाथ नहीं लगा कुछ खास,कोर्ट अवमानना से बचने के लिए EPF देने की घोषणा

PATNA: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने गांधी मैदान से जनता के नाम संबोधन में सूबे के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों और उनके परिवारजनों की निगाहें टिकी हुई थी।सीएम नीतीश ने शिक्षकों पर बात भी की और कुछ ऐलान भी किया. मुख्यमंत्री के ऐलान को शिक्षक कोई नई घोषणा नहीं मान रहे.ऐसा इसलिए क्योंकि सेवा शर्त देने की घोषणा पहले ही सरकार कर चुकी है। जहां तक ईपीएफ के लाभ देने की बात है तो यह न्यायालय की अवमानना से बचने और अपने ही बनाए कानून को अब तक लागू नहीं करने पर पर्दा डालने की कोशिश है. 

शिक्षक संगठनों और नेताओं द्वारा फैलाई गई थी अफवाह

कई शिक्षकों ने कहा कि पिछले कई दिनों से शिक्षक संघ के नेताओं द्वारा यह खबर फैलाई जा रही थी कि 15 अगस्त को नियोजित शिक्षकों के लिए वेतनमान, सेवाशर्त, नियोजित शब्द हटाने, पंचायती राज व्यवस्था से अलग करने सहित अन्य घोषणा की जाएगी। मगर आज नियोजित शिक्षकों के हाथ निराशा लगी। यह भी स्पष्ट हो गया कि सरकार और विभाग की मिलीभगत से एक बार फिर से नियोजित शिक्षक मूर्ख बन गए। 

नयूज 4 नेशन की खबर लगी मुहर

शुक्रवार को ही न्यूज4नेशन ने खुलासा कर दिया था कि शिक्षक संगठनों और शिक्षक प्रतिनिधियों द्वारा मात्र अफवाह फैलाई जा रही है। साथ ही स्पष्ट किया था कि सेवा शर्त बनाने और उसे अधिसूचित करने की पूरी प्रक्रिया क्या है। जिसकी पुष्टि भी आज मुख्यमंत्री के घोषणा से हो गई। यानी काम चालू है जल्द प्रकिया पूर्ण होने के बाद नई सेवा शर्त लागू की जाएगी।

सेवाशर्त देने की पहले भी हो चुकी है घोषणा

नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त तो सरकार ने 2015 में ही लागू करने की घोषणा कर चुकी थी। सेवा शर्त में क्या प्रावधान और नियमावली होगी इसके लिए विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों की कमेटी मंत्रिमंडल के अनुमोदन  एवं सरकार /शिक्षा विभाग के संकल्प के बाद बनाई गई है। पदनाम में कुछ तकनीकी अड़चनों के कारण पिछले दिनों मंत्रिमंडल ने कमेटी का पुनर्गठन हुआ। कमेटी की बैठक भी हुई और वह इस पर काम कर रही है। कमेटी द्वारा अपनी अनुशंसा शिक्षा विभाग को सौंपने और विभाग द्वारा सभी विभागों यथा कानून, वित्त आदि से सहमति लेने के बाद सेवा शर्त प्रस्ताव पर राज्य मंत्रीमंडल के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। मंत्रीमंडल द्वारा मोहर लगने के बाद शिक्षा विभाग द्वारा नियोजित शिक्षकों के लिए नई सेवा शर्त नियमावली अधिसूचित की जाएगी। 

न्यायालय की अवमानना और ईपीएफ एक्ट की बाध्यता 

जानकार बताते हैं कि सीएम नीतीश कुमार ने आज शिक्षकों को इपीएफ देने की बात की है वह कोई नई नहीं बल्कि सरकार ने न्यायालय की अवमानना से बचने और सरकार द्वारा बनाए गए कानून की अवहेलना पर पर्दा डालने के लिए की गई है। बताते चलें कि ईपीएफ एक्ट के प्रावधान के अनुसार निजी, अर्ध सरकारी, सरकार के उपक्रम आदि के कर्मियों सहित सभी असंगठित मजदूरों व कर्मियों को ईपीएफ का लाभ देने की बाध्यता है। लेकिन आज तक राज्य सरकार ने यह लाभ नियोजित शिक्षकों को ना देकर सरकार ने खुद ही अपने ही बनाए कानून की अवहेलना की। एक ओर जहां सरकार प्राइवेट सेक्टरों में इस कानून को कडाई से पालन कराती है। मगर इस कानून का सरकार ने पालन न कर एक्ट के नियमों के तहत बड़ा अपराध किया है। क्योकि ईपीएफ एक्ट के तहत कर्मियों को लाभ नहीं देना अपराध की श्रेणी में रखा गया है। खास बात यह है कि 2006 से अब तक ईपीएफ का लाभ देने की आवाज मजबूती से नहीं उठाई गई। 

सरकार के साथ मिलकर शिक्षक संगठनों ने किया गुमराह 

ईपीएफ एक्ट 1955 होने के बावजूद इसकी अर्हता रखने वाले नियोजित शिक्षकों को गुमराह कर सरकार की मिलीभगत से शिक्षक संगठनों ने ईपीएफ को छोड़कर यूटीआई पेंशन स्कीम के लिए समझौता किया। मजेदार बात यह है कि अभी तक मात्र 1 से 2 प्रतिशत ही नियोजित शिक्षकों का यूटीआई में इस स्कीम के तहत खाता खुलवाया गया और कटौती भी अनियमित होती है। चौकाने वाली बात यह है कि सरकार द्वारा घोषित किए गए अपने हिस्से के ऐसे शिक्षकों के खाते में 200 रूपये प्रति माह की राशि जो इस स्कीम का एक फूटी कौड़ी भी आज तक नहीं दी गई और शिक्षक संगठन इस मुद्दे पर मौन थे।

नियोजित शिक्षकों द्वारा दर्ज किया गया केस 

अरवल और औरंगाबाद के कुछ नियोजित शिक्षकों ने मिलकर पटना उच्च न्यायालय में राज्य के नियोजित शिक्षकों को ईपीएफ का लाभ देने के लिए केस किया और उनके पक्ष में फैसला आने के बाद इसका क्रेडिट लेने की होड़ संगठनों और नेताओं के बीच लग गई। 

तत्कालीन मुख्य सचिव ने ईपीएफ लागू करने का दिया था निर्देश 

बताते चलें कि 2015 में ही सरकार के तत्कालीन मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने सभी विभागों के प्रमुखों को पत्र लिखकर उनके अधीनस्थ सभी नियोजित, कॉन्ट्रैक्ट आदि कर्मियों  ईपीएफ का लाभ देने का निर्देश दिया था। तब न विभाग ने इस आदेश पर कोई संज्ञान लिया और न ही शिक्षक संगठनों व प्रतिनिधियों ने आवाज उठाई। 

न्यायालय ने लगाई थी फटकार

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अनिल कुमार उपाध्याय ने इस केस की सुनवाई के दौरान नाराजगी जाहिर की थी और ईपीएफ कमिश्नर को कड़ी फटकार लगाई थी।उन्हें 90 दिनों के अंदर पूरी प्रक्रिया पूर्ण कर सभी नियोजित शिक्षकों इसका लाभ देने का निर्देश दिया था। ईपीएफ कमिश्नर ने राज्य के मुख्य सचिव सहित शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर इस आदेश का हवाला देते हुए ईपीएफ लागू करने में सहयोग मांगा था, लेकिन विभाग ने चुप्पी साध ली थी। तब ईपीएफ ने सभी नियोजन ईकाईयो स्पष्टीकरण जारी करते हुए उनका यूआईएन नम्बर भी जारी किया। न्यायालय के आदेश के 90 दिन ज्यादा बीत जाने के बावजूद भी ईपीएफ का लाभ नहीं मिलता देख पुन: यह मामला न्यायालय के आदेश क

कई शिक्षक संगठन ने दी मुख्यमंत्री को बधाई 

आज मुख्यमंत्री द्वारा कोई नई शौगात नहीं देने के बावजूद भी शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को बधाई दी और आज की घोषणा को अपनी उपलब्धि एवं शिक्षकों के आंदोलन की जीत बताई है। 

फिर से अफवाह का दौर जारी 

शिक्षकों संगठनों के द्वारा एक बार फिर से दावा किया जा रहा है कि 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के अवसर पर नियोजित शिक्षकों के लिए कई लाभ की घोषणा की जाएगी। तब तक साढ़े तीनलाख शिक्षकों को िंतजार करना पड़ेगा.

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