बिहार के विश्विद्यालयों में कुलपति ही नहीं, उच्च शिक्षा का पूरा बंटाधार

बिहार के विश्विद्यालयों में कुलपति ही नहीं, उच्च शिक्षा का पूरा बंटाधार

PATNA : नीतीश कुमार अपने सुशासन और शिक्षा में सुधार को लेकर लगातार गाल बजाते रहते हैं लेकिन हाल बहुत ही खराब है। प्राथमिक विद्यालयों में जहां शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों की भारी कमी है तो वहीं दूसरी तरफ बिहार के तीन विश्वविद्यालयों में फिलहाल कुलपति ही नहीं है। 

2 विश्वविद्यालयों के सर्च के लिए तो कमेटी तक नहीं है लगातार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार का ढिंढोरा पीटने वाली बिहार सरकार के 3 विश्वविद्यालयों में मगध विश्वविद्यालय बोधगया डॉ भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर तथा नालंदा खुला विश्वविद्यालय पटना में कुलपति ही नहीं है। मगध विश्वविद्यालय में तो प्रति कुलपति का पद भी खाली है।

गौरतलब है की लगातार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी से जूझ रहा जूझ रहे बिहार के विश्वविद्यालयों में अभी बहुत सुधार की जरूरत है।

नॉर्थ ईस्ट का ऑक्सफोर्ड का है जाने वाला पटना विश्वविद्यालय तो शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है तो वही तो दूसरी तरफ बिहार के विश्वविद्यालयों में अब कुलपति की कमी भी साफ देखी जा रही है। 

हालांकि बताया जा रहा है की तीन खाली पड़े कुलपतियों के पद के लिए राज्यपाल भवन में कब का आवेदन दिया जा चुका है। इसके लिए गठित सर्च कमेटी ने कुछ नामों की अनुशंसा भी की थी लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाने के कारण नियुक्ति नहीं हो पाई नए सिरे से फिलहाल कमेटी बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है।

वही बाकी दो विश्वविद्यालयों के लिए तो बताया जा रहा है की सर्च कमेटी तक का गठन नहीं हुआ है। 

हालांकि बिहार में नए राज्यपाल फागू चौहान की नियुक्ति हो चुकी है अब सारा दारोमदार उन्ही पर है। लेकिन सवाल है जब आवेदन देने के बाद भी सहमति नहीं बन पाती तो फिर कुलपतियों की नियुक्ति तो दूर की कौड़ी है। फिलहाल कुलपति विभिन्न विश्वविद्यालयों को प्रभारी के भरोसे चलाया जा रहा है। 


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