स्थानीय को रोजगार देने की मांग को लेकर NPGC में तालाबंदी की कोशिश नाकाम, राजद विधायक ने सरकार पर निकाली भड़ास

स्थानीय को रोजगार देने की मांग को लेकर NPGC में तालाबंदी की कोशिश नाकाम, राजद विधायक ने सरकार पर निकाली भड़ास

AURANGABAD : नबीनगर में NPGC की बिजली परियोजना में स्थानीय लोगो को रोजगार देने की मांग को लेकर क्षेत्रीय विधायक विजय कुमार सिंह उर्फ डबल्यू सिंह की तालाबंदी आंदोलन की औरंगाबाद जिला प्रशासन ने आज हवा निकाल दी। हालांकि इसके बाद विधायक बेहद गुस्से में है और इसे लेकर उन्होने बिहार सरकार और औरंगाबाद जिला प्रशासन पर जमकर भड़ास निकाली है।

नबीनगर के विधायक के नेतृत्व में मंगलवार को निकली उस मार्च की जो NPGC की बिजली परियोजना के गेट पर पहुंचनी थी और वहां स्थानीय लोगो को रोजगार देने की मांग को लेकर प्रदर्शन के बाद तालाबंदी की जानी थी, पर परियोजना के गेट पर पहुंचने के पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हे और उनके समर्थको को रोक दिया। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने विधायक से ससम्मान कहा कि आपने प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी लेकिन यह अनुमति वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण को लेकर 26 अगस्त तक धारा 144 के तहत लागू निषेधाज्ञा के कारण नही दी जा सकती और इसकी पूर्व सूचना भी उन्हे दी जा चुकी है। इसके बावजूद प्रदर्शन करना नियमों और कानून का उल्लंघन होगा। 

सिर्फ विपक्ष के लिए है प्रोटोकॉल, उनके लोग कर सकते हैं रोड शो

इसके बाद विधायक वहां से समर्थकों के साथ भले ही लौट गये लेकिन इसे लेकर उन्होने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। विधायक ने राज्य सरकार पर गुस्सा निकालते हुए कहा कि राज्य सरकार नियम कानून सिर्फ विपक्षी दलों पर ही लागू करती है। राजधानी पटना में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह, केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के सम्मान समारोह तथा औरंगाबाद भारतीय जनता युवा मोर्चा की राज्य कार्यसमिति की बैठक जिसमें उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और अन्य कई भाजपाई मंत्री शामिल होते है, उनपर यह सब नियम कानून लागू नही होता है। यह सब सरकार की दोरंगी नीति है, जिसका वे पुरजोर विरोध करते हैं।

भीड़ जुटाने के लिए तेजस्वी के पहुंचने की हुई थी घोषणा, पोस्टर भी लगाए गए

गौरतलब है कि इस प्रदर्शन में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के भी भाग लेने को प्रचारित किया गया था और इस आशय के होर्डिंग भी लगाए गये थे। माना जा रहा है कि यह सिर्फ भीड़ जुटाने के लिए लिए अपना गया हथकंडा था। हालांकि बताया गया कार्यक्रम की अनुमति रहने पर शायद नेता प्रतिपक्ष यहां आते और उनके आने से अपनी पार्टी में विधायक का कद भी ऊंचा होता पर औरंगाबाद जिला प्रशासन ने आंदोलन के पहले ही लंगड़ी मार दी। 

डीन मौआर की रिपोर्ट



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