बिहार में नहीं है कोई सेफः हाई प्रोफाइल रूपेश मर्डर केस के बाद अब अफसर की हत्या ,क्या अब भी सुशासन का इकबाल बचा है ?

बिहार में नहीं है कोई सेफः हाई प्रोफाइल रूपेश मर्डर केस के बाद अब अफसर की हत्या ,क्या अब भी सुशासन का इकबाल बचा है ?

PATNA: बिहार में न आम लोग सुरक्षित हैं न खास।हर तरफ त्राहिमाम मचा है और सुशासन की सरकार चैन की नींद सो रही। बिहार की पुलिस आम आदमी की बात छोड़िए सरकारी अफसरों को भी सुरक्षित नहीं रख सकती। पटना में हाईप्रोफाईल रूपेश मर्डर केस की जिसकी निगरानी खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर रहे हैं।उसका तो खुलासा हुआ नहीं अब एक अधिकारी की हत्या में लापरवाही का दाग पुलिस पर लग गया.

खत्म हुआ पुलिस का इकबाल

18 जनवरी से गायब मसौढ़ी के प्रखंड कृषि पदाधिकारी अजय कुमार की हत्या कर दी गई और शव को नदी किनारे ठिकाने लगा दिया गया। इधर,पुलिस अपहरण का दर्ज कर इत्मिनान से सो गई। छह दिन बाद आज BAO अजय कुमार का सड़ा-गला शव बरामद हुआ है। अपहर्ताओं ने हत्या कर उनका शव गौरीचक थाना के साहेब नगर में मोरहर नदी के किनारे फेंक दिया था। शव बरामद होने की सूचना मिलते ही कई थानों की पुलिस के साथ पटना के वरीय पुलिस पदाधिकारी वहां पहुंचे। शव को पटना के कंकड़बाग थाने में भेजा गया। अजय कुमार कंकड़बाग के ही रहने वाले थे। वे पिछले सोमवार को ही पटना से अपने कार्यालय जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन न तो मसौढ़ी प्रखंड कृषि कार्यालय पहुंचे, न ही शाम तक लौट कर वापस पटना आए। सोमवार शाम से मंगलवार सुबह तक उनके परिजन मोबाइल पर कॉल करते रहे लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया। 19 जनवरी की सुबह 9 बजे के बाद से उनका मोबाइल भी ऑफ हो गया था।

रूपेश हत्याकांड की निगरानी सीएम नीतीश कर रहे

 


जिस केस की निगरानी मुख्यमंत्री कर रहे हों उसमें ही पुलिस के पास कहने को कुछ भी नहीं है। आप इसे आश्चर्यजनक नहीं तो और क्या कहेंगे? 12 जनवरी से 24 जनवरी आ गया लेकिन सुशासन की पुलिस रूपेश हत्याकांड में अब तक हवा में ही तीर चला रही है।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब तक रूपेश हत्याकांड में खुले तौर पर तीन दफे पुलिस को सख्त निर्देश दे चुके फिर भी सुशासन की पुलिस एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है। मतलब साफ है कि समय बीतने के साथ ही पुलिस मामले को भूलाने में जुटी है।पुलिस कभी एयरपोर्ट टेंडर विवाद को वजह बता रही तो कभी एक बड़े ठेकेदार पर शक कर रही है।साजिशकर्ता की बात छोड़िए पटना पुलिस तो अब तक शूटर्स को भी नहीं पहटान सकी है। इन सब के बीच बड़ा सवाल यही कि जिस केस की निगरानी खुद मुख्यमंत्री कर रहे हों उसमें अगर रिजल्ट शून्य है तो फिर अन्य केसों का तो भगवान ही मालिक है। 

 जानिए घटना के अगले दिन 13 जनवरी को सीएम नीतीश ने क्या कहा था ....

 12 जनवरी की घटना के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 13 जनवरी को संज्ञान लेते हुए खुद डीजीपी से बात की थी और इंडिगो के स्टेशन मैनेजर रूपेश कुमार सिंह की हत्या से संबंधित अद्यतन जानकारी ली. डीजीपी ने मुख्यमंत्री को बताया था कि इस हत्याकांड के उद्भेदन के लिए एसआईटी गठित कर त्वरित कार्रवाई की जा रही है. मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक को सख्त निर्देश देते हुए कहा था कि इस हत्याकांड के अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी करें और स्पीडी ट्रायल कराकर दोषियों को जल्द से जल्द कठोर सजा दिलाएं. मुख्यमंत्री ने डीजीपी को निर्देश दिया कि अपराध की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे. पुलिस अपराधियों के खिलाफ पूरी सख्ती से पेश आए. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस हत्याकांड को लेकर वे काफी गंभीर हैं और स्वयं लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं.फिर 19 जनवरी को सीएम नीतीश ने डीजीपी को तलब कर यही बातें कही।

एयरपोर्ट के पार्किंग विवाद में हुई रूपेश की हत्या-डीजीपी

19 जनवरी को डीजीपी एसके सिंघल ने एयरपोर्ट पार्किंग के विवाद में रूपेश की हत्या किए जाने का शक जाहिर किया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने के बाद बाहर निकले डीजीपी ने पत्रकारों से कहा था कि एयरपोर्ट की पार्किंग को लेकर बहुत बड़ा विवाद चल रहा था। इसके अलावा उनके परिजनों या जान-पहचान वाले लोगों के ठेकेदारी से जुड़ा इश्यू भी आया था मगर इसमें कोई बात सामने नहीं आई है। मूल चीज यही है कि जो विवाद है वो रुपये-पैसे को लेकर या पार्किंग को लेकर ही लगता है। पुलिस ने ह्यूमन और तकनीकी इंटेलिजेंस की मदद ली है। इस मामले में थोड़ा और काम करने की जरूरत है कि केस स्ट्रॉंग बन जाए। हमें पूरा भरोसा है कि पुलिस केस का उद्भेदन कर लेगी। बता दें, पिछले मंगलवार यानी 12 जनवरी को पटना एयरपोर्ट के इंडिगो मैनेजर रूपेश सिंह की राजधानी पटना के पुनाईचक में शाम सात बजे गोलियों से छलनी कर दिया गया था। हाईप्रोफाइल हत्याकांड के बाद बिहार में सुशासन राज पर सवाल खड़े हो गए हैं.


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