इंडियन हेड इंज्यूरी फाउंडेशन की ओर से डॉ सुनील ने ट्रांसपोर्ट अधिकारियों से की मुलाकात, नए मोटर वाहन अधिनियम का किया समर्थन

इंडियन हेड इंज्यूरी फाउंडेशन की ओर से डॉ सुनील ने ट्रांसपोर्ट अधिकारियों से की मुलाकात, नए मोटर वाहन अधिनियम का किया समर्थन

PATNA : नए मोटर वाहन कानून भारत सरकार का एक ऐसा कानून है, जिससे प्रत्येक साल लाखों जाने बचायी जा सकती है. गौरतलब है की भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं से 1,50,000 से अधिक लोग मारे जाते हैं और करीब 1.5 मिलियन लोग दुर्घटनाग्रस्त होकर बेड पर जिंदगी को जीने के लिए जंग लड़ने को विवश होते है. ऐसे लोगों को हर साल न्यूरो पुनर्वसन की आवश्यकता होती है. इन दुर्घटनाओं में से अधिकांश की मृत्यु और विकलांगता 18 से 40 वर्ष की ऊम्र में हो जाती है. ऐसे लोगों की अधिकांश संख्या निचले सामाजिक.आर्थिक समूह से आती है. बता दें की देश में न्यूरो.पुनर्वसन के लिए बहुत सीमित सुविधाएं हैं. इन परिस्थितियों में इंडियन हेड इंज्यूरी फाउंडेशन भारत में आरटीए से होने वाली मौतों और विकलांगों की संख्या को कम करने के लिए नए मोटर वाहन अधिनियम का समर्थन करता हैं. उपरोक्त बातें डॉ. सुनील कुमार सिंह नेत्र रोग विशेषज्ञ और जदयू   प्रदेश महासचिव ने संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए कही. बता दें की डॉ. सुनील कुमार इंडियन हेड इंज्यूरी फाउंडेशन की ओर से ट्रांसपोर्ट अधिकारियों से मुलाकात कर नए मोटर वाहन अधिनियम को सख्ती से लागु करने की अपील की है. गौरतलब है की इंडियन हेड इंज्यूरी फाउंडेशन के मानद डायरेक्टर डॉ. राजेंद्र कुमार हैं.    

डॉ सुनील ने यह भी बताया की इस कानून को सख्ती से लागू किया जाये ताकि निर्दोष जीवन को मौत और विकलांगता को बचाया जा सके. विशेष अभियान   के तहत प्रशासन स्पीडिंग-रेसिंग और खतरनाक ड्राइविंग करने वालों पर भी नजर रखे. उन्होंने कहा कि भारत को सड़क हादसों के कारण मानव संसाधन के साथ भारी मात्रा में आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है. आईआरएफ के अध्ययन के मुताबिक भारत में सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल हुए पीड़ित को औसतन पांच लाख रुपये के ख़र्च का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता है. 

इससे पीड़ित के अलावा समूचा परिवार प्रभावित होता है. डॉ. सुनील कुमार सिंह ने कहा कि शराब तथा अन्य नशीले पदार्थों का सेवन कर वाहन चलाना बेहद खतरनाक होता है, इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है. दुपहिया वाहन चालकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला आइएसआइ मार्क (ISI Mark) का हेलमेट जान बचाने में मदद करता है. एक सितंबर से मोटर वाहन (संशोधित) अधिनियम-2019 लागू का समर्थन करते हैं। IHIF समय समय पर जागरूकता कार्यक्रम चलाता है।


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