UP के बहाने BJP अध्यक्ष ने 'कुशवाहा' को खूब सुनाया, कहा- पहले जाति की पार्टी बनाते फिर थोड़े लाभ के लिए जाति-पार्टी दोनों बेच देते

UP के बहाने BJP अध्यक्ष ने 'कुशवाहा' को खूब सुनाया, कहा- पहले जाति की पार्टी बनाते फिर थोड़े लाभ के लिए जाति-पार्टी दोनों बेच देते

पटना. बिहार में एनडीए के घटक दलों के बीच इन दिनों वाकयुद्ध चरम पर है. चाहे भाजपा हो या जदयू या फिर हम और वीआइपी सभी दल एक दूसरे के खिलाफ नेताओं या दल का नाम लिए बिना लगातार विषवमन कर रहे हैं. इसी क्रम में शुक्रवार को बिहार भाजपा अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने जदयू के एक बड़े नेता पर बिना नाम लिए कटाक्ष किया. जायसवाल ने भाजपा पर हाल के दिनों में हमलावर रहे जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा को यूपी विधानसभा चुनाव के बहाने खूब सुनाया. 

उन्होंने कहा, ना खाऊंगा ना खाने दूंगा के अपने कुछ राजनैतिक नुकसान भी हैं। कल तक जो सरकार में मंत्री बने बैठे थे उन्हें यह लग रहा है कि चुनाव के समय एक ऐसे दल में चले जाएं जो स्वयं भी खाता हो और साथियों को भी खिलाता हो। ज्यादातर ऐसे साथी  2017 में दल में आए थे और अब 5 वर्ष मंत्री रहने के बाद उन्हें चुनाव घोषणा के साथ ही बहुत सारी दिक्कतें होने लगी हैं।

दरअसल, उपेन्द्र कुशवाहा वर्ष 2014 में केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री बनाये गए थे. बाद में उन्होंने लोकसभा चुनाव 2019 में अपनी अलग राह पकड़ी और यूपीए में चले गये. लेकिन, चुनावी समर में दो लोकसभा सीटों से किस्मत अजमाने के बाद भी उन्हें कहीं से जीत नहीं मिली. वहीं बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में तीसरे मोर्चे का गठन करने के बाद भी कुशवाहा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और 2021 में उन्होंने अपने दल आरएलएसपी का विलय जदयू में कर लिया. वहीं पिछले कुछ दिनों के दौरान उन्होंने यूपी चुनाव, सम्राट अशोक आदि कुछ मुद्दों पर भाजपा के खिलाफ खूब कटाक्ष किया. उसी को लेकर संजय जायसवाल ने हमला बोला है. 

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का सिद्धांत नेताओं के लिए नहीं बल्कि जनता के लिए उत्कृष्ट साबित हुआ है। आज केंद्र सरकार ने डीबिटी के माध्यम से 20 लाख करोड़ रुपए जनता के खातों में सीधे दिया है पर कहीं भी भ्रष्टाचार नहीं हो सका ।

चुनाव में फैसला सदैव जनता करती है और जनता योगी जी और भाजपा के साथ है। पर भविष्य में हमें भी ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है जो अपनी जाति के बल पर पार्टी बनाते हैं और फिर थोड़े लाभ के लिए अपनी जाति और पार्टी दोनों को बेच देते हैं । दरअसल ऐसा कहकर उन्होंने कुशवाहा के दल के जदयू में विलय पर कटाक्ष किया. 

उन्होंने कहा, ऐसे व्यक्तियों के लिए सत्ता अपना आधार बढ़ाने का माध्यम होता है जिससे हर चुनाव में किसी नए दल मे खुद को और अपने समर्थकों को बेच सकें। नेताजी तो फिर से नये दल में सत्ता के शीर्ष पर पहुंच जाते हैं पर उनके समर्थक आवाक खड़े रह जाते हैं।

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