जनता राज या वन मैन सरकार ? सुधाकर सिंह से पहले 'नीतीश' के खास मंत्री ने भी किया था खुलासा, ''मंत्रियों की बात चपरासी तक नहीं सुनता''...कोई हैसियत ही नहीं

जनता राज या वन मैन सरकार ? सुधाकर सिंह से पहले 'नीतीश' के खास मंत्री ने भी किया था खुलासा, ''मंत्रियों की बात चपरासी तक नहीं सुनता''...कोई हैसियत ही नहीं

PATNA: बिहार की नीतीश सरकार में मंत्रियों की हैसियत चपरासी के बराबर है. मंत्रियों की बात चपरासी तक नहीं सुनते. मंत्री का आदेश रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जाता है। वास्तव में सचिव ही विभाग के मुखिया होते हैं. मंत्री तो सिर्फ रबर स्टांप होता है। नीतीश कुमार के सुशासन राज की सच्चाई यही है. यह हम नहीं कह रहे बल्कि नीतीश कैबिनेट में शामिल उन मंत्रियों का दर्द है. हाल ही में सीएम नीतीश की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले और मंत्री पद से इस्तीफा देकर महागठबंधन में भूचाल लाने वाले सुधाकर सिंह के बयानों से न सिर्फ सरकार बल्कि जेडीयू के नेता बैकफुट पर हैं. पूर्व कृषि मंत्री के बयानों से सीएम नीतीश तिलमिलाये हुए हैं. ऐसा नहीं कि यह बात सिर्फ राजद कोटे के मंत्री रहे सुधाकर सिंह कह रहे, बल्कि पिछले साल नीतीश कुमार के खास मंत्री रहे मदन सहनी ने भी बिहार के मंत्रियों की वास्तविक हैसियत बताई थी। 2021 में मंत्री मदन सहनी ने इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा था कि अधिकारी की बात छोड़िए चपरासी भी मंत्री की बात नहीं सुनता. हम फोन करते हैं तो अधिकारी फोन तक रिसीव नहीं करते. मुख्यमंत्री भी बात नहीं करते. उसी बात को राजद कोटे के मंत्री रहे सुधाकर सिंह उठा रहे हैं तो जेडीयू तिलमिला जा रही है.

बिहार में वन मैन सरकार !

बिहार में महागठबंधन की सरकार है. नीतीश कुमार एनडीए से नाता तोड़कर राजद का साथ लेकर आठवीं दफे मुख्यमंत्री बने हैं. राजद कोटे से कृषि मंत्री रहे सुधाकर सिंह सीएम नीतीश की नीतियों की पोल खोलकर रख दी। वे कैबिनेट की मीटिंग से बाहर निकल गये। कई दफे वे कृषि रोड मैप समेत अन्य मुद्दों पर सीधे तौर पर नीतीश कुमार से टकराये। स्थिति ऐसी हो गई कि उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भी वे सीएम नीतीश पर हमलावर हैं. रविवार को उन्होंने एक बार नीतीश कुमार की सरकार को कटघरे में खड़ा किया और कहा कि राज्य में एक मालिक है और बाकी सब मुख्तार हैं. 


मास्टर के नाराज होने के डर से मंत्री से झट से करता है दस्तखत

पूर्व कृषि मंत्री और राजद विधायक सुधाकर सिंह  रविवार को कैमूर जिले के हाटा में कहा कि इस सरकार में दो तरह के लोग हैं। एक मालिक है और बाकी लोग मुख्तार हैं‌। क्या लोकतंत्र ऐसा चलेगा. उन्होंने कहा कि मंत्रियों की हैसियत चपरासी के बराबर है. उधर से सचिव फाइल भेजता है और मंत्री झट से दस्तखत कर देता है. ऐसा इसलिए करता है कि कहीं मास्टर नाराज न हो जाये. बिहार में आज ये स्थिति है. सुधाकर सिंह ने बिना नाम लिये नीतीश कुमार को मास्टर बताया और मंत्रियों को चपरासी की संज्ञा दी। रोजगार के सवाल पर कहा कि बिहार के भीतर 10- 20 लाख लोगों रोजगार और नौकरी देने की बात की जा रही है यह ठीक वैसे ही बात है जैसे केंद्र की सरकार 15 लाख के जुमले सुना रही थी। फिलहाल बिहार सरकार भी 10- 20 लाख लोगों को रोजगार नौकरी देने की जुमला बांट रही है। दरअसल यह सरकार वोट बैंक की राजनीति कर रही है। 

मदन सहनी ने कहा था- मंत्री की बात चपरासी तक नहीं सुनते 

1जुलाई 2021,तब बिहार में एनडीए की सरकार थी. जेडीयू कोटे से मदन सहनी समाज कल्याण विभाग के मंत्री थे. मदन सहनी के आदेश पर जब 30 जून तक विभाग के अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं हुआ तो वे आपा खो दिये थे और नीतीश सरकार की पोल खोल कर रख दी। नीतीश कुमार के खास मंत्री मदन सहनी ने यहां तक कह दिया था कि इस राज में सिर्फ मुख्यमंत्री की बात सुनी जाती है. मंत्रियों की कोई हैसियत नहीं है। तब मदन सहनी ने कहा था, " सालों से वे परेशानी और यातना झेल रहे हैं. वो मंत्री, मंत्री पद की सुविधा भोगने के लिए नहीं बने हैं, जनता की सेवा करने के लिए बने हैं. ऐसे में जब वे जनता का काम ही नहीं कर पाएंगे, तो मंत्री रहकर क्या करेंगे." उनका कहना है कि अधिकारी क्या विभाग के चपरासी भी उनकी बात नहीं सुनते हैं. कहीं मेरी बात नहीं सुनी जाती है. पत्र का जवाब नहीं मिलता. मैं इसके लिए किसी को जिम्मेवार नहीं मानता. यहां अफसर निरंकुश हो गए हैं. केवल मंत्री ही नहीं, वो किसी जनप्रतिनिधि की बात नहीं सुनते हैं. उन्होंने कहा, " यहां तो चोरी भी है और सीनाजोरी भी. यहां के अफसर भ्रष्ट हैं. लोग आरोप लगाते हैं कि नेता चोर होते हैं. मैं कहता हूँ कि अफसर चोर हैं. कई सालों से सुधार करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन सुधार करने की ओर कोई काम नहीं किया जाता है."


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