खुली पोल: बिहार में 3.6 लाख केस पेंडिंग, HC के तल्ख तेवर के बाद हरकत में पुलिस मुख्यालय

खुली पोल: बिहार में 3.6 लाख केस पेंडिंग, HC के तल्ख तेवर के बाद हरकत में पुलिस मुख्यालय

पटना. करीब 10 महीनों से बिहार में विभिन्न मामलों से जुड़े 3.6 लाख से अधिक केस पुलिस थानों की फाइलों में पड़े हुए हैं। एफआईआर के बाद भी इन कांडों का अंतिम प्रपत्र संबंधित न्यायालयों में नहीं जमा किया गया है। इसका खुलासा तब हुआ है, जब हाईकोर्ट ने पुलिस मुख्यालय को फटकार लगाते हुए कांडों की जिलावार सूची सौंपी है। इसके बाद पुलिस मुख्यालय हरकत में आया और इन कांडों को जल्द निष्पदन का निर्णय लिया है। इसके लिए मुख्यालय एक कमेटी का गठन करेगा।

मिली जानकारी के अनुसार प्राथमिकी दर्ज होने के 300 दिनों के बाद भी काण्डों में अंतिम प्रपत्र न्यायालयों में समर्पित नहीं किए जाने को लेकर उच्च न्यायालय ने पुलिस मुख्यालय को फटकार लगाई है। इसके बाद हाईकोर्ट की प्राप्त जिलावार सूची के आलोक में पुलिस मुख्यालय ने वरीय स्तर पर बैठकर लम्बित काण्डों के निष्पादन किए जाने के लिए निर्णय लिया है। राज्य में वर्तमान में 367162 लम्बित काण्डों के निष्पादन में गति लाए जाने के लिए वरीय स्तर पर यह निर्णय लिया गया है कि मुख्यालय स्तर पर एक कमेटी गठित की जाएगी, जिसमें बिहार पुलिस मुख्यालय के पुलिस उप महानिरीक्षक (प्रशासन), गृह विभाग तथा विधि विभाग से एक एक संयुक्त सचिव स्तर के पदाधिकारी सदस्य होंगे। इस कमेटी के द्वारा राज्य स्तर पर काण्डों के निष्पादन का अनुश्रवण किया जाएगा।

जिला स्तर पर भी काण्डों के निष्पादन के अनुश्रवण के लिए कमेटी गठित की जाएगी, जिसमें जिले के मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, अपर जिला दण्डाधिकारी तथा पुलिस उपाधीक्षक स्तर के पदाधिकारी सदस्य होंगे। इस कमेटी के द्वारा प्रत्येक 15 दिनों पर बैठक की जाएगी तथा निष्पादन के स्थिति की समीक्षा की जाएगी। 3 महीनों तक विशेष अभियान के माध्यम से इस कार्य को मूर्त स्वरूप दिया जाएगा। जिलों में लम्बित काण्डों की सूची जिला पुलिस अधीक्षकों को उपलब्ध करा दी गई है।

बिहार पुलिस मुख्यालय के स्तर से पुलिस उप महानिरीक्षक (प्रशासन) को इसका नोडल बनाया गया है। इस सम्बन्ध में सभी जिलों के पदाधिकारियों / क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक तथा उप महानिरीक्षक को दिनांक 30 अगस्त 2022 को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग में आवश्यक दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं, ताकि उक्त काण्डों का अधिकाधिक निष्पादन हो सके तथा अंतिम प्रपत्र न्यायालय में समर्पित किया जा सके।

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