बक्सर में आज से पंचकोशी मेला शुरू, अहिल्या धाम पहुंचा श्रद्धालुओं का जत्था, जानिये इसका महत्व...

बक्सर में आज से पंचकोशी मेला शुरू, अहिल्या धाम पहुंचा श्रद्धालुओं का जत्था, जानिये इसका महत्व...

बक्सर. विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक पंचकोशी मेले की शुरुआत आज से हो गयी है. पंचकोशी यात्रा के पहले पड़ाव में बक्सर के अहिरौली से मेले की शुरुआत हुयी थी, जहां दूर दराज से हजारों श्रद्धालु अहिरौली पहुंचे और माता अहिल्या के मंदिर में गंगा स्नान कर पूजा अर्चना की. अहिरौली पहुंचे महिला श्रद्धालु माता अहिल्या के मंदिर में दीप जलाती है और सुख समृद्धि की कामना करती है.

अहिरौली में स्थित माता अहिल्या का मंदिर काफी प्राचीन है और यही गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बनी अहिल्या को भगवान श्रीराम के चरण स्पर्श से मुक्ति मिली थी. हनुमान के ननिहाल अहिरौली है, जो अहिल्या हनुमान जी की नानी है. यंहा पहुंचने वाले भक्त माता अहिल्या के मंदिर में पूजा पाठ करते हैं.

जब भगवान श्री राम बक्सर पहुंचे थे, तब पांच जगहों की परिक्रमा की थी. पंचकोशी परिक्रमा के दौरान उन्होंने तरह तरह के पकवान और स्वादिष्ट भोजन किया था. प्रसाद के रूप में पहले दिन अहिरौली में पुआ बनता है और लोग उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. 24 नवंबर से शुरू होकर 28 नवंबर तक चलनेवालों पंचकोशी मेले के आखिरी दिन बक्सर में लिट्टी चोखा बनाया जाता, जिसका बड़े स्तर पर आयोजन होता है.

पड़ाव के अंतिम दिन भगवान राम ने भी लिट्टी चोखा प्रसाद के रूप में ग्रहण किया था. इस दिन देश भर से बक्सर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है. ऐसी मान्यता है कि पहले पड़ाव में अहिल्या धाम पहुंचे श्रद्धालु अहिल्या माता की पूजा पाठ करते हैं और दीपक जलाते हैं तो उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है.

खासकर इस जगह की ऐसी मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान की प्राप्ति नहीं होती है, वे यंहा संतान प्राप्ति की मन्नत मांगते हैं और फिर मन्नत पूरी होने के बाद यहां आंचल डांस की प्रथा है. जिसे लोग स्थानीय भाषा में लौंडा नाच भी कहते हैं. मन्नतें पूरी होने के बाद लोग अपनी संतान के साथ आते हैं और आंचल डांस के जरिए माता अहिल्या का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जो आज भी कायम है.


Find Us on Facebook

Trending News