बिहार में बाढ़ की तबाही पर फूटा पप्पू यादव का गुस्सा, सरकारी पैसे से पार्टी चला रहे CM नीतीश

बिहार में बाढ़ की तबाही पर फूटा पप्पू यादव का गुस्सा, सरकारी पैसे से पार्टी चला रहे CM नीतीश

पटना : जन अधिकार पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष सह पूर्व सांसद पप्‍पू यादव ने बिहार में आई भीषण बाढ़ के लिए नेताओं को जिम्‍मेवार ठहराया और कहा कि प्रदेश में हर साल आने वाला बाढ़ सत्ता और विपक्ष के लिए सरकारी कोष लूटने का साधन बन गया है। इसमें उनकी सहायता पदाधिकारी और ठेकेदार करते हैं। पटना आवास पर पत्रकार वार्ता के क्रम में केंद्र और राज्‍य की सरकार को भी पप्‍पू यादव ने बाढ़ को लेकर निशाना बनाया। साथ ही उन्‍होंने पिछले 30 सालों में सिंचाई एवं जल संसाधन  विभाग के मंत्री रहे नेताओं की संपत्ति जांच की भी मांग की। उन्‍होंने कहा कि इन विभागो के मंत्री मुख्‍यमंत्री के करीबी ही होते रहे हैं। यही वजह है कि बाढ़ के नाम पर भ्रष्‍टाचार से जो राशि मिलती है, उसका इस्‍तेमाल चुनाव लड़ने और पार्टी चलाने में सत्ताधारी दल करते रहे हैं।  

पूर्व सांसद ने कहा कि बिहार में बांध की आयु 20-22 वर्ष है, जो अब खत्‍म हो गई। चाहे वो फरक्‍का हो या भीमनगर बराज। भीम नगर बराज टूटने के कगार पर है। इसकी आयु 22 साल पहले खत्‍म हो चुकी है और वहां गाद भयंकर मात्रा में जमा है। ऐसे में अगर वहां बराज टूटता है, तो बिहार में प्रलय आ जायेगा और इसकी पूरी जिम्‍मेवारी सरकार की होगी। भीम नगर बराज की जांच हो। गाद का प्रेशर खूब है। या चौड़ीकरण हो उसे हटाया जाय। फरक्‍का बिहार और यूपी की जिंदगी को नासूर बनाया है, इसलिए फरक्‍का को हटाना जरूरी है। अगर फरक्‍का को अविलंब हटाया नहीं गया तो एक दिन बिहार की जनता सोई रह जायेगी। आज किसी नदी का पानी समुद्र में नहीं जाता है।

पप्‍पू यादव ने कहा कि बीते 30 वर्षों में सत्ता और विपक्ष दोनों ने मिलकर राज किया है। लेकिन फिर भी किसी ने बाढ़ से बिहार की जनता को निजात दिलाने के लिए कुछ भी नहीं किया। उल्‍टा बाढ़ इनके लिए उत्‍सव है, जिससे हर साल लगभग 70 लाख करोड़ रूपए नदी और बांध के नाम पर बर्बाद होते हैं। बाढ़ का सबसे ज्‍यादा नुकसान कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल को झेलना पड़ता है। बाढ़ से हर साल भवन से लेकर सड़क तक का नुकसान होता है। इस वजह से बाढ़ प्रभावित इलाके में विकास कार्य प्रभावित होते हैं। हमें जहां से विकास कार्यों को आगे बढ़ाना होता है, बाढ़ की वजह से हम वहीं रूक जाते हैं और फिर से निर्माण में लग जाते हैं। बाढ़ से जान माल की क्षति तो होती है, उससे अधिक क्षति राजकीय कोष को होता है।  

उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बिहार की जनता के साथ सौतेला व्‍यवहार करने का आरोप लगाया और कहा कि पीएम मोदी उड़ीसा और असम को करोडों की मदद की, लेकिन बिहार के साथ यह उपेक्षा क्‍यों। बीबीसी ने अपने एक रिपोर्ट में बिहार के बारे लिखा कि बिहार की स्थिति सिरीया से भी बद्दतर है। फिर प्रधानमंत्री ने बिहार को बदहाल क्‍यों छोड़ दिया, जबकि बिहार ने उन्‍हें सर आखों पर बिठाया। प्रधानमंत्री आखिर बिहार की जनता को क्‍यों भूल गए? बिहार क्‍या पाकिस्‍तान बांगलादेश में है? बिहार ने 39 सीटें दी, लेकिन आज उनका दर्द बांटने के लिए आपको फुर्सत क्‍यों नहीं है ?  

अंत में उन्‍होंने बाढ़ प्रभावित 18 जिलों में लोगों के बीच तीन महीने तक 25 हजार रूपए और 20 क्विंटल अनाज देने की मांग की। वहीं, बाढ़ में टूटे पक्‍के मकान के लिए ढा़ई लाख, फूस के मकान के लिए एक लाख, जानवर के लिए 40 हजार और किसानों की लगान माफी की मांग की। संवाददाता सम्‍मेलन में राष्ट्रीय प्रधान महासचिव एजाज अहमद, प्रदेश अध्यक्ष  रघुपति सिंह, राष्ट्रीय महासचिव सह प्रवक्ता प्रेमचंद सिंह, राष्ट्रीय महासचिव राजेश रंजन पप्पू एवं प्रदेश महासचिव अरुण  कुमार सिंह उपस्थित थे।

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