पारस हॉस्पिटल दरभंगा में पित्त की नली का पत्थर बिना ऑपरेशन निकाला गया

पारस हॉस्पिटल दरभंगा में पित्त की नली का पत्थर बिना ऑपरेशन निकाला गया

DARBHANGA : पित्त की नली में पत्थर के कारण जानलेवा बीमारी पीलिया (जाँडिस) रोग से दो माह से जूझ रहे 62 साल के बुजुर्ग जगदीश महतो को पारस ग्लोबल हॉस्पिटल, दरभंगा के गैस्ट्रो रोग के डॉ. शरद कुमार झा, डी.एम. ने इंडोस्कोपी रेट्रो कोलानजियो पैनक्रिएटोग्राफी (ई.आर.सी.पी) नामक आधुनिक विधि से पत्थर निकालकर राहत दिलाई। कई जगह इलाज करवाने के बाद भी मरीज को राहत नहीं मिलने पर उसे पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जहां डॉ. झा ने उसे राहत दिलाई। अब वह बिल्कुल ठीक है।

डॉ. झा ने बताया कि इस विधि में चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है। मुंह की तरफ से इंडोस्कोपी डालकर यह ऑपरेशन किया जाता है जो कि आज की तारीख में आधुनिक विधि है अन्यथा उसे लैप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन कराना पड़ता। उन्होंने कहा कि मरीज का बिलिरूबीन 18 पहुंच गया था जो कि किसी मरीज के लिए गंभीर अवस्था होती है। जब मरीज को यहां भर्ती किया गया तो जांच में पता चला कि उसकी पित्त की नली में पत्थर है जिससे उसको पीलिया रोग हो गया है। मात्र आधे घंटे में उसकी पित्त की नली से 10 मिलीमीटर का पत्थर निकाल दिया गया। पत्थर निकल जाने के बाद मरीज का बिलिरूबीन सामान्य हो गया और अब वह पूर्ण स्वस्थ है।

डॉ. झा पारस ग्लोबल हॉस्पिटल में अब तक इस विधि से 50 से अधिक ऑपरेशन कर चुके हैं। क्लोनोस्कोपी विधि से यहां कॉलो या आंतो में गांठ को भी निकाला जाता है। इस तरह अभी तक कई मामलों में यहां बिना ऑपरेशन इंजेक्शन द्वारा बवासीर, बिना चीरा लगाये पेट से सिक्का, बैटरी आदि निकाले जा चुके हैं। पूरे मिथिलांचल में इंडोस्कोपी विधि से पारस ग्लोबल हॉस्पिटल में ही किसी वस्तु को निकाला जाता है और मिथिला मे केवल पारस ही ऐसा अस्पताल है जहाँ ई.आर.सी.पी. विधी द्वारा डॉ. शरद मरीजों का आधुनिक इलाज करते हैं।

अपने इलाज से पूर्णतः संतुष्ट मरीज जगदीश महतो ने पारस ग्लोबल हॉस्पिटल और डॉ. शरद कुमार झा की प्रशंसा की और कहा कि अगर हम यहां नहीं आए होते तो हमारा क्या हाल होता यह हम नहीं बता सकते।

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